उत्तर प्रदेश के इटावा में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए मौलाना जरजिस के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। दरअसल उनपर आरोप है कि 23 जून को उन्होंने अपने संबोधन में भगवान श्रीकृष्ण को मुसलमान बताते हुए उन्हें पांच वक्त का नमाजी कहा था। वहीं कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद इस बयान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगीं है।
वहीं विरोध बढ़ने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और अब लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इसके बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वीडियो वायरल होने के बाद कई हिंदू संगठनों और संतों ने बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है।
स्वामी शांडिल्य महाराज ने बयान की आलोचना की
दरअसल हिंदू संगठनों का कहना था कि इस तरह की टिप्पणियां धार्मिक भावनाओं को प्रभावित कर सकती हैं और समाज में विवाद पैदा कर सकती हैं।दरअसल श्रृंगवेरपुर पीठाधीश्वर स्वामी शांडिल्य महाराज ने बयान की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी धर्म के पूजनीय व्यक्तित्व पर इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है।
महंत रविंद्र पुरी ने भी दिया बड़ा बयान
वहीं, जुना अखाड़े से जुड़े स्वामी शैलेशानंद महाराज ने कहा कि इस तरह के बयान केवल विवाद पैदा करते हैं और समाज में तनाव बढ़ाते हैं। हरिद्वार में महंत रविंद्र पुरी ने भी बयान पर दुख जताते हुए मुस्लिम धर्मगुरुओं से अपील की कि वे ऐसे मामलों में जिम्मेदारी से आगे आएं और समाज में सौहार्द बनाए रखने का संदेश दें।
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब आगे क्या होगा?
वहीं हजरतगंज थाने में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस अब पूरे प्रकरण की जांच करेगी। जांच के दौरान वायरल वीडियो की सत्यता, बयान का पूरा संदर्भ और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाएगी। इसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।






