भोपाल। मध्य प्रदेश की धरती पर अफ्रीका से लाए गए चीतों की वापसी ने न केवल कूनो नेशनल पार्क को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी, बल्कि प्रदेश की छवि में एक नया अध्याय भी जोड़ा। अब वही रफ्तार और आत्मविश्वास खेल के मैदान तक पहुंच गया है। राज्य सरकार ने ‘खेलो MP यूथ गेम्स’ के लिए चीते को आधिकारिक मैस्कॉट (शुभंकर) घोषित किया है, जो प्रदेश की युवा ऊर्जा और खेल के प्रति नई सोच का प्रतीक है।
यह निर्णय सिर्फ़ एक जानवर का चुनाव नहीं, बल्कि उस भावना का प्रतिनिधित्व है जिसे मध्य प्रदेश खेलों के माध्यम से युवाओं में भरना चाहता है। यह गति, चपलता और निरंतर प्रयास का संदेश है, जो युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
चीता ही क्यों बना शुभंकर?
मैस्कॉट के चयन के पीछे एक गहरी सोच है। चीता दुनिया का सबसे तेज़ दौड़ने वाला ज़मीनी जीव है, लेकिन उसकी पहचान सिर्फ़ गति तक सीमित नहीं है। उसकी फुर्ती, संतुलन और असाधारण फिटनेस उसे दूसरे जानवरों से अलग बनाती है। आधुनिक खेलों, खासकर एथलेटिक्स, फुटबॉल, कबड्डी और ट्रैक इवेंट्स में यही गुण एक खिलाड़ी की सफलता तय करते हैं। यूथ गेम्स का मुख्य उद्देश्य भी युवाओं में ताकत से ज़्यादा गति, सहनशक्ति और मूवमेंट को बढ़ावा देना है। इसी सोच के साथ चीते को मैस्कॉट के रूप में चुना गया।
बाघ और सिंह की जगह चीते को प्राथमिकता
मध्य प्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ के नाम से जाना जाता है, इसलिए कई लोगों के मन में यह सवाल उठा कि बाघ को मैस्कॉट क्यों नहीं बनाया गया। जवाब साफ है, इस प्रतियोगिता का संदेश शक्ति प्रदर्शन या प्रभुत्व नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धात्मक ऊर्जा और गतिशीलता है।
बाघ जहां ताकत और एकांत प्रभुत्व का प्रतीक है, वहीं सिंह नेतृत्व और सत्ता को दर्शाता है। इसके विपरीत, चीता गति, चपलता और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का प्रतिनिधित्व करता है—ये सभी गुण युवा खिलाड़ियों के करियर की बुनियाद होते हैं।
कूनो की नई पहचान से जुड़ा खेलों का भविष्य
चीते का चयन सीधे तौर पर कूनो नेशनल पार्क की सफलता से भी जुड़ता है। कूनो ने मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान दिलाई है। इस पहचान को खेलों से जोड़कर यह संदेश दिया गया है कि प्रदेश केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत का संरक्षक नहीं, बल्कि भविष्य का निर्माता भी है। जंगल में दौड़ता चीता अब मैदान में दौड़ते युवा खिलाड़ी का प्रतीक बन गया है।
इस मैस्कॉट के जरिए सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—खिलाड़ियों में गति और फिटनेस की संस्कृति विकसित करना, ग्रामीण और शहरी प्रतिभाओं को एक मंच देना और खेल को सिर्फ़ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि जीवनशैली बनाना। चीता यहां डर का नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का चेहरा है।
डिस्क्लेमर: यह लेख खेलो MP यूथ गेम्स के मैस्कॉट चयन को लेकर सामने आए तथ्यों, आयोजन की प्रकृति और खेलों की मूल भावना के आधार पर तैयार किया गया एक explainer विश्लेषण है। इसमें व्यक्त किए गए विचार किसी भी सरकारी विभाग या अधिकारी का आधिकारिक बयान नहीं हैं, बल्कि MP Breaking News की संपादकीय समझ और व्याख्या पर आधारित हैं।





