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इंदौर बायपास मरम्मत कब शुरू होगी? सांसद शंकर लालवानी की मुलाकात के बाद नितिन गडकरी ने 100 करोड़ की मंजूरी दी

Written by:Ankita Chourdia
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इंदौर की लाइफलाइन माने जाने वाले 23 साल पुराने बायपास के नवीनीकरण के लिए केंद्र ने 100 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। सांसद शंकर लालवानी ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात में सड़क की खराब स्थिति और दोपहिया चालकों के खतरे का मुद्दा उठाया था। अब जियोग्रिड तकनीक के साथ री-लेयरिंग और कारपेटिंग का काम शुरू किया जाएगा।
इंदौर बायपास मरम्मत कब शुरू होगी? सांसद शंकर लालवानी की मुलाकात के बाद नितिन गडकरी ने 100 करोड़ की मंजूरी दी

इंदौर बायपास पर लंबे समय से उठ रही सुरक्षा और रखरखाव की चिंता पर अब बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बायपास के नवीनीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह निर्णय सांसद शंकर लालवानी की हालिया मुलाकात के बाद लिया गया, जिसमें सड़क की खराब सतह, गड्ढों और बढ़ते हादसों का मुद्दा प्रमुखता से रखा गया था।

शहर में प्रतिदिन हजारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। लेकिन कई हिस्सों में सड़क की ऊपरी परत उखड़ जाने से खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ गया था। बाइक फिसलने की घटनाएं बढ़ने की बात भी बैठक में उठाई गई। इसी पृष्ठभूमि में मंत्रालय स्तर पर इंदौर बायपास और आसपास के राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति की समीक्षा की गई और वित्तीय स्वीकृति जारी की गई।

23 साल पुराने बायपास पर व्यापक कारपेटिंग की तैयारी

इंदौर बायपास को बने करीब 23 साल हो चुके हैं। समय के साथ भारी ट्रैफिक और घिसावट के कारण इसकी सतह कई जगह कमजोर हो गई। प्रस्तावित काम में री-लेयरिंग के साथ व्यापक कारपेटिंग शामिल है, ताकि सड़क की संरचना फिर से स्थिर हो सके और ट्रैफिक मूवमेंट सुरक्षित रहे।

अधिकारियों के अनुसार मंजूर राशि से खराब हिस्सों का तकनीकी आकलन, परत की मजबूती और नई सतह बिछाने का काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इसका सीधा असर दैनिक आवागमन पर पड़ेगा, क्योंकि यह मार्ग शहर की प्रमुख कनेक्टिविटी लाइन माना जाता है।

जियोग्रिड तकनीक क्या बदलेगी

इस परियोजना की सबसे अहम बात यह है कि कारपेटिंग में जियोग्रिड तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। सामान्य भाषा में इसे सड़क की मजबूती बढ़ाने वाली सिंथेटिक जियोमटेरियल परत कहा जा सकता है। इसे मिट्टी और सड़क की संरचना के बीच बिछाया जाता है, जिससे नीचे की पकड़ बेहतर होती है और ऊपरी परत पर तनाव का असर कम पड़ता है।

तकनीकी रूप से इसका उद्देश्य दरारें, उखड़न और बार-बार पैचवर्क की जरूरत को कम करना है। यह स्पष्ट किया गया है कि इसे किसी तरह की ‘कांच की लेयर’ नहीं माना जाए, बल्कि एक मजबूत इंजीनियरिंग परत के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके ऊपर डामरीकरण होने से सतह अपेक्षाकृत चिकनी और टिकाऊ बनने की उम्मीद है।

दोपहिया चालकों की सुरक्षा पर फोकस

इंदौर बायपास की मौजूदा स्थिति को लेकर सबसे बड़ा सवाल सड़क सुरक्षा का था। गड्ढों और असमान सतह के कारण दोपहिया चालकों के लिए खतरा अधिक बताया गया। तेज रफ्तार और भारी वाहनों के साथ मिश्रित यातायात में छोटी खराबियां भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। इसी वजह से इस परियोजना को केवल रखरखाव नहीं, बल्कि सुरक्षा हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।

“प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मंत्री नितिन गडकरी का यह निर्णय इंदौरवासियों के लिए वरदान साबित होगा। केंद्र सरकार की बदौलत हमारी यातायात व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। दोपहिया चालकों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। अब बायपास पर सफर सुरक्षित और सुगम होगा।” — शंकर लालवानी, सांसद

मंजूरी के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि री-लेयरिंग का काम कितनी जल्दी जमीन पर शुरू होता है और किन हिस्सों को प्राथमिकता दी जाती है। फिलहाल इतना तय है कि 100 करोड़ रुपये की यह परियोजना इंदौर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक की संरचनात्मक स्थिति सुधारने की दिशा में बड़ा कदम है।

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