ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों नक्षत्रों की तरह ग्रहण का बड़ा महत्व माना जाता है, जब भी कोई ग्रहण लगता है तो उस घटना को खगोलीय घटनाओं में से एक माना जाता है। साल 2025 की तरह 2026 में कुल 4 ग्रहण लगेंगे। इसमें 2 सूर्य और 2 चंद्र ग्रहण शामिल हैं। साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 और चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगा था। इसमें से सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई दिया लेकिन आशिंक चंद्र ग्रहण देखने को मिला, जिसके चलते सूतककाल भी मान्य रहा। अब अगस्त महीने में अगले ग्रहण लगेंगे। आइए जानते हैं साल का दूसरा चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण कब लगेगा…
कब लगेगा साल का दूसरा Surya Grahan ?
साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 (बुधवार) को लगेगा। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा। यह आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। यह ग्रहण रात के समय लगने के कारण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत में इसका कोई ज्योतिषीय प्रभाव या सूतक नहीं लगेगा।
कब लगेगा साल का दूसरा Chandra Grahan ?
साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को लगेगा। यह साल का आखिरी ग्रहण होगा, जो कि एक आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) होगा। मुख्य रूप से उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के पश्चिमी हिस्सों में देखा जा सकेगा , लेकिन भारत में यह नजर नहीं आएगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।
कब लगता है चन्द्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण
चंद्र ग्रहण : सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच आ जाती है, इस दौरान चांद धरती की छाया से पूरी तरह से छुप जाता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक दूसरे के बिल्कुल सीध में होते हैं। इस दौरान जब हम धरती से चांद देखते हैं तो वह हमें काला नजर आता है और इसे चंद्रग्रहण कहा जाता है।आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान सिर्फ चांद का एक भाग पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है। चंद्रमा के धरती की तरफ वाले हिस्से पर धरती की छाया काली दिखाई देती है, कटा हिस्सा दिखाई देता है, तो वह इस पर निर्भर करता है कि किस प्रकार सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में हैं।
सूर्य ग्रहण: जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है तो सूरज की रोशनी धरती तक पहुंच नहीं पाती है, तो सूर्य ग्रहण लगता है। आंशिक सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य एक लाइन में सीधे नहीं होते। इस कारण चंद्रमा सूर्य के कुछ हिस्से को ही ढक पाता है। चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच आ जाती है। इस दौरान चांद धरती की छाया से पूरी तरह से छुप जाता है।पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक दूसरे के बिल्कुल सीध में होते हैं। इस दौरान जब हम धरती से चांद देखते हैं तो वह हमें काला नजर आता है और इसे चंद्रग्रहण कहा जाता है।
ग्रहण में क्या करें और क्या नहीं?
- ग्रहण के सूतक काल में पूजा पाठ बंद कर देना चाहिए।
- ग्रहण के अवधि के दौरान घर के पूजा वाले स्थान को पर्दे से ढक दें।
- ग्रहण में भूलकर भी देवी-देवताओं की पूजा नहीं करना चाहिए।
- ग्रहण के दौरान खाना-पीना नही चाहिए।
- खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए
- ग्रहण की समाप्ति के बाद घर और पूजा स्थल को गंगाजल का छिड़काव करके शुद्ध करना चाहिए।
- गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, उन्हें घर से
- बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही ग्रहण देखना चाहिए।
- ग्रहण के सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, सोना, बाल काटना, तेल लगाना,
सिलाई-कढ़ाई करना और चाकू चलाना नहीं चाहिए।
(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)






