होलिका दहन के बाद एक दिन का इंतज़ार पूरा कर आखिर वो दिन आ ही गया..जिसका लोग सालभर बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। आज रंग है…लोगों के चेहरों पर, दिलों में, हवाओं में गीतों में। धुलेंड़ी का दिन जब हाथों में रंग होते हैं, दिल में उमंग, रसोई में पकवानों की महक और गलियां मोहल्ले हंसी-ठिठोली से गूंज उठते हैं। बच्चे पिचकारियों के साथ दौड़ते दिखाई देते हैं, ढोल-मांदर की थाप पर लोग थिरकते हैं और रंग-गुलाल खेलकर रिश्तों को और मज़बूत बनाया जाता हैं।
रंगों, उमंग और सामाजिक मेल-मिलाप का पर्व होली भारत के सबसे जीवंत त्योहारों में से एक माना जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह उत्सव वसंत ऋतु के आगमन, बुराई पर अच्छाई की जीत और समाज में आपसी भाईचारे का प्रतीक है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर गले मिलते हैं, गीत-संगीत और पारंपरिक व्यंजनों के साथ उत्सव मनाते हैं। समय के साथ होली भारत की सांस्कृतिक पहचान बन गई है और आज यह दुनिया के कई देशों में भी मनाई जाती है।
होली से मिलते जुलते पर्व
दिलचस्प बात यह है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी ऐसे कई त्योहार हैं जिनकी भावना, उत्साह या शैली किसी न किसी रूप में होली से मिलती-जुलती दिखाई देती है। कहीं लोग एक-दूसरे पर पानी डालते हैं, कहीं फलों की बारिश के बीच उत्सव मनाया जाता है, कहीं टमाटर फेंके जाते हैं तो कहीं प्रकृति के रंगों का जश्न मनाया जाता है। आइए जानते हैं दुनिया के अलग अलग हिस्सों में होली से मिलते जुलते कौन से त्यौहार मनाए जाते हैं।
स्पेन का ‘ला टोमाटीना’: टमाटरों की बारिश
स्पेन के बुनोल शहर में हर साल अगस्त के अंतिम बुधवार को मनाया जाने वाला ला टोमाटीना दुनिया के सबसे अनोखे उत्सवों में गिना जाता है। इस दिन हजारों लोग सड़कों पर इकट्ठा होते हैं और एक-दूसरे पर टमाटर फेंकते हैं। कुछ ही मिनटों में पूरा शहर टमाटर के लाल रंग से रंग जाता है।
इतिहासकारों के अनुसार इस उत्सव की शुरुआत 1940 के दशक में हुई, जब स्थानीय युवाओं के बीच हुए मजाकिया झगड़े में सब्जी बाजार के टमाटर एक-दूसरे पर फेंके गए और धीरे-धीरे यह एक परंपरा बन गई। आज यह स्पेन का प्रसिद्ध पर्यटन उत्सव बन चुका है और लोग दूर दूर से इसे देखने और इसमें शामिल होने आते हैं।
थाईलैंड का सोंगक्रान: पानी के साथ नए साल का स्वागत
थाईलैंड में अप्रैल के मध्य में मनाया जाने वाला सोंगक्रान पारंपरिक थाई नववर्ष का उत्सव है। तीन दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में लोग सड़कों पर निकलकर एक-दूसरे पर पानी डालते हैं। परंपरागत रूप से यह धार्मिक अनुष्ठान से जुड़ा हुआ था, जिसमें बुद्ध प्रतिमाओं पर जल अर्पित किया जाता था और बुजुर्गों के हाथों पर पानी डालकर आशीर्वाद लिया जाता था। धीरे-धीरे यह परंपरा बड़े जल-उत्सव में बदल गई। आज थाईलैंड के बड़े शहरों में लोग पानी की पिचकारियों, बाल्टियों और पानी की बंदूकों से एक-दूसरे को भिगोते हैं।
इटली का ‘बैटल ऑफ ऑरेंजेस’: संतरे की मजेदार लड़ाई
इटली के इव्रिया शहर में कार्निवाल के दौरान मनाया जाने वाला बैटल ऑफ ऑरेंजेस भी अनोखा सामूहिक उत्सव है। इसमें लोग दो समूहों में बंटकर एक-दूसरे पर संतरे फेंकते हैं। यह परंपरा मध्यकालीन इतिहास से जुड़ी मानी जाती है। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार यह उत्सव एक अत्याचारी शासक के खिलाफ जनता के विद्रोह की याद में मनाया जाता है। संतरे फेंकना उस संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। उत्सव के दौरान हजारों लोग इसमें भाग लेते हैं और शहर की गलियां संतरे के रंग से भर जाती हैं।
पोलैंड का श्मिगुस-डिंगुस: पानी का खेल
पोलैंड और मध्य यूरोप के कुछ हिस्सों में ईस्टर के बाद सोमवार को श्मिगुस-डिंगुस नामक उत्सव मनाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे पर पानी डालते हैं और मजाकिया अंदाज में भीगने-भिगाने का खेल चलता है। इतिहासकारों के अनुसार इसकी जड़ें प्राचीन स्लाविक वसंत परंपराओं में हैं, जहां पानी को शुद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता था। बाद में यह ईसाई ईस्टर उत्सव के साथ जुड़ गया। अब यह त्योहार युवाओं और बच्चों के बीच खासा लोकप्रिय है और कई शहरों में लोग बाल्टियों, बोतलों और पानी की पिचकारियों से एक-दूसरे को भिगोते हैं।
जापान का हनामी: प्रकृति के रंगों का उत्सव
जापान में वसंत ऋतु के दौरान मनाया जाने वाला हनामी चेरी ब्लॉसम यानी सकुरा के फूलों के खिलने का उत्सव है। इस दौरान लोग पार्क और बागानों में परिवार और दोस्तों के साथ बैठकर फूलों की सुंदरता का आनंद लेते हैं। हालांकि इसमें रंग या पानी से खेलने की परंपरा नहीं है लेकिन यह भी प्रकृति के रंगों और वसंत ऋतु का उत्सव है। गुलाबी और सफेद फूलों से सजे पेड़ों के नीचे बैठकर लोग पिकनिक करते हैं और प्रकृति की सुंदरता का जश्न मनाते हैं।






