हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर है और 5 मार्च को नामांकन होना है, लेकिन कांग्रेस अभी तक अपने प्रत्याशी को लेकर सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इसी वजह से शिमला से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक चर्चा तेज है कि आखिर पार्टी हाईकमान किस नाम पर मुहर लगाएगा।
इस बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वह बीती शाम कसौली पहुंच चुके हैं और उनके शिमला आने की भी संभावना जताई जा रही है। पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को देखने वाले नेताओं का कहना है कि उनके नाम पर संगठन और सरकार के बीच सहमति बन सकती है।
नामांकन से ठीक पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई है। यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उम्मीदवार की घोषणा इसी बैठक के आसपास होने की संभावना जताई जा रही है।
दावेदारों की सूची में कौन-कौन
आनंद शर्मा के अलावा पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह का नाम भी चर्चा में है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुक्खू ने हाईकमान के सामने आनंद शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल के नाम की पैरवी की है।
राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि यदि पार्टी किसी संतुलित और संगठनात्मक संदेश के साथ उम्मीदवार उतारना चाहती है, तो उसे स्थानीय नेतृत्व की प्राथमिकता और केंद्रीय नेतृत्व के राजनीतिक संकेत—दोनों को साथ लेकर चलना होगा। इसी संदर्भ में शांडिल का नाम केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं माना जा रहा।
इन दो नामों के अलावा पूर्व मंत्री आशा कुमारी, एडवोकेट जनरल अनूप रत्न और मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार गोकुल बुलेट के नाम भी चर्चाओं में शामिल बताए जा रहे हैं।
गैर-हिमाचली नेताओं में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत, पवन खेड़ा और हिमाचल प्रभारी रजनी पाटिल के नाम पर भी सियासी चर्चा चल रही है। संकेत यह हैं कि हाईकमान इन नामों में से किसी एक विकल्प पर विचार कर सकता है, लेकिन राज्य इकाई की प्राथमिकता अलग दिखाई दे रही है।
स्थानीय बनाम बाहरी चेहरे की बहस
हिमाचल कांग्रेस के कई नेता इस बार स्थानीय चेहरे को राज्यसभा भेजने की वकालत कर रहे हैं। उनकी दलील का आधार पिछले वर्ष का अनुभव है। फरवरी 2024 में कांग्रेस ने बाहरी उम्मीदवार के तौर पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी को मैदान में उतारा था।
उस चुनाव में कांग्रेस के पास बहुमत होने के बावजूद परिणाम उसके पक्ष में नहीं गया था। पार्टी के 6 विधायकों ने बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी, जिसके बाद चुनावी नतीजा कांग्रेस के लिए राजनीतिक झटका माना गया। यही कारण है कि इस बार उम्मीदवार चयन को लेकर राज्य इकाई ज्यादा सतर्क दिख रही है।
पार्टी के भीतर यह तर्क भी सामने रखा जा रहा है कि यदि उम्मीदवार को लेकर स्थानीय स्तर पर असहजता रही तो चुनावी प्रबंधन कठिन हो सकता है। इसलिए नेतृत्व ऐसा नाम चाहता है जिसे विधायक दल और संगठन दोनों स्वीकार कर सकें।
सुक्खू की राजनीतिक गणित और कैबिनेट संतुलन
आनंद शर्मा को मुख्यमंत्री सुक्खू का करीबी माना जाता है। दूसरी ओर, धनीराम शांडिल को राज्यसभा भेजने की संभावना को कुछ नेता मंत्रिमंडलीय संतुलन के नजरिए से भी देख रहे हैं। मौजूदा स्थिति में सुक्खू कैबिनेट में अकेले शिमला संसदीय क्षेत्र से 5 मंत्री हैं, जबकि अन्य 3 संसदीय क्षेत्रों से मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को मिलाकर 6 मंत्री हैं।
ऐसे में अगर शांडिल राज्यसभा जाते हैं तो आगे चलकर मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के नए विकल्प खुल सकते हैं, खासकर कांगड़ा जिले के संदर्भ में। इस राजनीतिक गणित को भी उम्मीदवार चयन की चर्चा में अहम कारक माना जा रहा है।
फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। नामांकन की समय-सीमा नजदीक है, विधायक दल की बैठक तय हो चुकी है, और पार्टी के अंदर कई नाम सक्रिय चर्चा में हैं। अब नजर इस पर है कि कांग्रेस हाईकमान अंतिम क्षण में कौन सा फैसला लेता है—स्थानीय सहमति वाला चेहरा, या संगठनात्मक संदेश देने वाला कोई दूसरा विकल्प।






