मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में शुक्रवार को बसंत पंचमी के अवसर पर सूर्योदय के साथ पूजा-अर्चना शांतिपूर्वक संपन्न हो गई। करीब एक दशक बाद ऐसा संयोग बना है जब बसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक ही दिन पड़ रही है। इस संवेदनशील मौके को देखते हुए प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं।
सुबह होते ही हिंदू समाज के लोग भोजशाला परिसर में एकत्रित हुए। महाराजा भोज वसंतोत्सव समिति के तत्वावधान में यज्ञ वेदी पर हवन-कुंड प्रज्वलित कर विधिवत पूजा की गई। गर्भगृह में मां वागदेवी (सरस्वती) का तैल चित्र स्थापित किया गया, जिसके बाद परिसर ‘मां वागदेवी’, ‘राजा भोज’ और ‘जय श्री राम’ के जयघोष से गूंज उठा।
8000 जवान तैनात, ड्रोन से निगरानी
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने भोजशाला को किले में तब्दील कर दिया है। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ CRPF और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के 8000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है। पूरे क्षेत्र की निगरानी ड्रोन कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद से की जा रही है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और पुलिस अधीक्षक ने सुबह खुद मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
सुरक्षा के मद्देनजर भोजशाला के 300 मीटर के दायरे को ‘नो-फ्लाई जोन’ घोषित किया गया है। इस इलाके में किसी भी तरह की उड़ान गतिविधि पर पूरी तरह से रोक है। श्रद्धालुओं को कई स्तरों की बैरिकेडिंग से गुजरकर प्रवेश दिया गया।
दोपहर में होगी जुमे की नमाज
प्रशासन ने दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग समय और स्थान निर्धारित किया है। दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच जुमे की नमाज अदा की जाएगी। इसके लिए भोजशाला परिसर को पूरी तरह खाली करा लिया गया है। मुस्लिम समाज ने प्रशासन के साथ सहमति जताते हुए सीमित और सांकेतिक रूप से नमाज अदा करने का निर्णय लिया है। इसके लिए एक अलग स्थान तय किया गया है।
पहले भी बन चुके हैं तनाव के हालात
भोजशाला को लेकर विवाद काफी पुराना है। इससे पहले साल 2003, 2013 और 2016 में भी बसंत पंचमी और शुक्रवार एक साथ पड़ने पर तनाव की स्थिति बन चुकी है। इन्हीं पुराने अनुभवों को देखते हुए इस बार प्रशासन ने पहले से ही अत्यधिक सतर्कता बरती है। फिलहाल, परिसर में माहौल शांत है और प्रशासन का दावा है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सभी एजेंसियां अलर्ट पर हैं।
मो. अंसार, धार





