लोकतंत्र में विरोध की आवाज़ को दबाना किसी भी सरकार के लिए उचित नहीं माना जाता है। मध्य प्रदेश में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में छतरपुर में चल रहे चिता आंदोलन पर हुई कार्रवाई और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की गिरफ्तारी ने अब भारी सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। इस पुलिसिया कार्रवाई को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भारतीय जनता पार्टी सरकार को सीधे घेरा है। सिंघार का कहना है कि सरकार असहमति की हर आवाज़ को दबाने के लिए तानाशाही का रास्ता अपना रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
उमंग सिंघार ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है। हमारी आपको सलाह है कि सरकार को यह समझना चाहिए कि असहमति की आवाज़ को कुचलना किसी भी लोकतांत्रिक शासन का आदर्श मॉडल नहीं हो सकता। सिंघार ने आगे कहा कि सरकार उन प्रदर्शनकारियों से भयभीत है जो उससे नहीं डरते, और यह एक गंभीर चिंता का विषय है। आपको इस पर ध्यान देना चाहिए।
सोनम वांगचुक और केन-बेतवा आंदोलन का जिक्र कर सरकार को घेरा
हाल ही में, जंतर-मंतर से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक जी और उनके साथियों को जिस तरह से बलपूर्वक हटाया गया, वह चिंताजनक है। और अब, केन-बेतवा लिंक परियोजना में भ्रष्टाचार, कानून के उल्लंघन और आदिवासी अधिकारों के मुद्दों पर आंदोलन कर रहे अमित भटनागर जी सहित सभी आंदोलनकारियों को पुलिस बल के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। हमारी आपको सलाह है कि सरकार को ऐसे कदमों से बचना चाहिए जो जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं और संवैधानिक मूल्यों का हनन करते हैं।
उमंग सिंघार ने भी की थी आंदोलनकारियों से मुलाकात
नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने बताया कि वे स्वयं 14 जुलाई को आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने वहां आंदोलनकारियों की पीड़ा को सुना था और उनकी लोकतांत्रिक लड़ाई में साथ खड़े रहने का भरोसा भी दिया था। परंतु, सरकार ने संवाद का रास्ता चुनने के बजाय दमन का मार्ग अपनाया है। यह एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है कि क्या अब इस देश में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाना भी एक जुर्म बन गया है? क्या आदिवासियों, किसानों और प्रभावित परिवारों की आवाज़ का एकमात्र जवाब पुलिस की गिरफ्तारी होगी? सरकार को इन सवालों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को समझना चाहिए।
सरकार पर तानाशाही रवैये का आरोप
भाजपा सरकार को यह बात भली-भांति समझनी चाहिए कि लोकतंत्र लाठी और गिरफ्तारी से नहीं, बल्कि संवाद और संविधान के सिद्धांतों पर चलता है। पिछले दो दिनों में शांतिपूर्ण आंदोलनों पर जिस तरह की कार्रवाई हुई है, वह स्पष्ट रूप से इंगित करती है कि देश को लोकतंत्र से दूर, तानाशाही और डर के माहौल की ओर धकेला जा रहा है। हमारी आपको सलाह है कि सरकार को इस दिशा में अपने कदमों पर पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि यह देश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए ठीक नहीं है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार हो।
गिरफ्तार आंदोलनकारियों की रिहाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अमित भटनागर जी सहित सभी गिरफ्तार आंदोलनकारियों की तत्काल रिहाई की पुरजोर मांग की है। हमारी आपको सलाह है कि सरकार को दमन का मार्ग छोड़कर प्रभावित लोगों की बातों को सुनना चाहिए। साथ ही, केन-बेतवा परियोजना से जुड़े सभी आरोपों और शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराना अत्यंत आवश्यक है। लोकतंत्र को दबाया जा सकता है, लेकिन उसे हराया नहीं जा सकता। सत्य और जनहित की आवाज़ हर हाल में बुलंद रहेगी, यह हमें स्मरण रखना चाहिए और इसके लिए प्रयास करते रहना चाहिए।
लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है, लेकिन भाजपा सरकार ने असहमति की हर आवाज़ को कुचलना अपना शासन मॉडल बना लिया है। डरती है सरकार उन प्रदर्शनकारियों से जो सरकार से नहीं डरते।
कल जंतर-मंतर से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक जी और उनके साथियों को जबरन हटाया गया, और आज… pic.twitter.com/VmjSIszCHE
— Umang Singhar (@UmangSinghar) July 19, 2026






