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MP का अनोखा गांव, जहां हर घर में गाय-भैंस… पर बेच नहीं सकते दूध!

Written by:Sanjucta Pandit
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एमपी की बात करें तो यहां कई सारे अजीबोगरीब मान्यताएं भी प्रचलित हैं, जिसकी एक छोटी सी घटना सीहोर जिले के एक गांव से सामने आई है, जिसे सुनकर आप और हम नहीं बल्कि हर कोई हैरान रह जाता है।
MP का अनोखा गांव, जहां हर घर में गाय-भैंस… पर बेच नहीं सकते दूध!

भारत का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश (MP) को टूरिज्म की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य माना जाता है। यहां की संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज, खान-पान इसे बाकी सभी राज्यों से अलग बनाता है। यहां की खूबसूरती लोगों का मन मोह लेती है। यहां एक से बढ़कर एक स्कूल, कॉलेज, इंडस्ट्री, पर्यटन स्थल, धार्मिक स्थल स्थित हैं। यहां का इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सिंगरौली आदि शहर काफी मशहूर हैं। इसके अलावा मां शारदा देवी का मंदिर भी पूरे देश में फेमस है, जहां नवरात्रि के समय भक्तों की भीड़ काफी अधिक बढ़ती है। वहीं बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भी सालों भर लोगों का आना-जाना लगा रहता है।

आज हम आपको मध्य प्रदेश के उस गांव से रूबरू करवाएंगे जहां हर घर में गाय और भैंस है, लेकिन यहां कोई भी इनका दूध दूसरे को नहीं बेच सकता है। इसकी वजह भी बेहद खास है। यह परंपरा सदियों से इस गांव के लोग निभाते चले आ रहे हैं। जो भी दूध लेने आता है, उसे फ्री में ही दे दिया जाता है।

बिशनखेड़ा

दरअसल, इस गांव का नाम बिशनखेड़ा है, जो कि जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित है। इस गांव की आबादी लगभग 800 लोगों की है, जहां हर घर में गाय और भैंस है। लेकिन यहां का दूध किसी भी कीमत पर बेचा नहीं जाता। ग्रामीणों का मानना है कि यदि कोई दूध के पैसे लेता है तो उसका पशु बीमार हो जाता है या फिर गांव से भाग जाता है। यही कारण है कि गांव वाले भूल कर भी दूध के पैसे नहीं लेते। जिन्हें जरूरत होती है, उन्हें मुफ्त में ही दूध दे दिया जाता है। इस परंपरा को सदियों से निभाया जा रहा है।

शुद्ध शाकाहारी

ग्रामीणों का कहना है कि देवनारायण बाबा, जो कि एक सिद्ध संत हैं, वह इस गांव की रक्षा कर रहे हैं। ऐसे में इस गांव का एक भी व्यक्ति शराब नहीं पीता, न ही इस गांव के लोग कोई मांस खाते हैं। यहां सब शुद्ध शाकाहारी हैं। इस गांव के अंदर कोई नहीं आ सकता। वहीं दूध का उपयोग भी लोग केवल घरेलू काम और स्वास्थ्य के लिए करते हैं, उसका व्यापार नहीं किया जाता है।

देते हैं दंड

कुछ लोगों ने इस परंपरा को तोड़ने की भी कोशिश की, लेकिन उन्हें धन की हानि हुई। ग्रामीणों की मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से देव बाबा नाराज हो जाते हैं और इसका उसे दंड भी देते हैं। यही कारण है कि इस गांव में दूध की नदियां तो बहती हैं, लेकिन यह कोई खरीद नहीं सकता है।

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Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit
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