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विश्व पर्यावरण दिवस 2026: CM मोहन यादव करेंगे ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ का शुभारंभ, 30 सितंबर तक चलेगा अभियान

Written by:Bhawna Choubey
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World Environment Day 2026 पर मध्य प्रदेश में हरियाली का बड़ा संकल्प, पौधारोपण, जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों की होगी शुरुआत।

हर साल 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस लोगों को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का सबसे बड़ा वैश्विक अभियान माना जाता है। बढ़ते प्रदूषण, जल संकट, जलवायु परिवर्तन और घटते वन क्षेत्र जैसी चुनौतियों के बीच यह दिन पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश में भी विश्व पर्यावरण दिवस पर कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस बार राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान का शुभारंभ करेंगे। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को पौधारोपण से जोड़ना और पर्यावरण संरक्षण में उनकी भागीदारी बढ़ाना है। सरकार का लक्ष्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनकी निगरानी और संरक्षण को भी सुनिश्चित करना है ताकि हर पौधा भविष्य में एक मजबूत वृक्ष बन सके।

‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान से प्रदेशभर में बढ़ेगी जनभागीदारी

राज्य सरकार द्वारा शुरू किया जा रहा ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान 5 जून से 30 सितंबर तक पूरे मध्य प्रदेश में चलाया जाएगा। इस दौरान नागरिकों, स्कूलों, कॉलेजों, उद्योगों, स्वयं सहायता समूहों, पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं को बड़े स्तर पर पौधारोपण के लिए प्रेरित किया जाएगा।

इस अभियान की खास बात यह है कि लगाए गए पौधों का जियो-टैगिंग और पंजीकरण ‘मेरी लाइफ’ पोर्टल पर किया जाएगा। इससे पौधों की निगरानी करना आसान होगा और यह भी पता चल सकेगा कि लगाए गए पौधे कितने सुरक्षित हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उनका संरक्षण और नियमित देखभाल भी उतनी ही जरूरी है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और हरित विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और व्यक्तियों को राज्य स्तरीय पर्यावरण पुरस्कार भी प्रदान करेंगे। कुल आठ श्रेणियों में 11 पुरस्कार दिए जाएंगे। इससे पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों और संस्थाओं को प्रोत्साहन मिलेगा।

जल संरक्षण, बावड़ियों का दस्तावेजीकरण और पर्यावरण जागरूकता पर रहेगा फोकस

इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जल संरक्षण से भी जुड़ा है। मुख्यमंत्री जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत 16 जिलों की 500 बावड़ियों के प्रलेखन दस्तावेजों का विमोचन करेंगे। यह पहल पारंपरिक जल स्रोतों को संरक्षित करने और उनके ऐतिहासिक महत्व को सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते जल संकट के दौर में पुराने जल स्रोतों का संरक्षण बेहद जरूरी हो गया है। मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में बावड़ियां और पारंपरिक जल संरचनाएं आज भी जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में उनका दस्तावेजीकरण और संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी जिलों में जन-जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इनमें पौधारोपण अभियान, पर्यावरण शपथ, स्वच्छता अभियान, रैलियां, चित्रकला और निबंध प्रतियोगिताएं शामिल रहेंगी। स्कूलों, कॉलेजों, एनएसएस, एनसीसी, नेहरू युवा केंद्र और स्वयंसेवी संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन संयुक्त राष्ट्र की थीम ‘Inspired by Nature, For Climate and For Our Future’ के अनुरूप किया जा रहा है। यह थीम लोगों को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर भविष्य को सुरक्षित करने का संदेश देती है।

मध्य प्रदेश में शुरू होने वाला ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, जल बचाव और जनभागीदारी को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। आने वाले महीनों में यह अभियान प्रदेश में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Bhawna Choubey
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मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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