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फडणवीस सरकार का बड़ा फैसला, अटल सेतु पर अब ये गाड़ियां नहीं देंगी टोल टैक्स

Written by:Neha Sharma
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मुंबई के अटल सेतु पुल पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अब टोल टैक्स नहीं देना होगा। महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार (21 अगस्त) को इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया। अधिकारियों ने शुक्रवार (22 अगस्त) को इसकी जानकारी दी।
फडणवीस सरकार का बड़ा फैसला, अटल सेतु पर अब ये गाड़ियां नहीं देंगी टोल टैक्स

मुंबई के अटल सेतु पुल पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अब टोल टैक्स नहीं देना होगा। महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार (21 अगस्त) को इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया। अधिकारियों ने शुक्रवार (22 अगस्त) को इसकी जानकारी दी। अटल सेतु भारत का समुद्र पर बना सबसे लंबा सी-ब्रिज है। पहले सरकार ने मोटर व्हीकल टैक्स एक्ट के तहत 21.8 किलोमीटर से अधिक लंबे सी-लिंक पर जाने वाली सभी गाड़ियों को टोल टैक्स के दायरे में रखा था, लेकिन अब इसमें संशोधन करते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों को छूट दी गई है।

इलेक्ट्रिक गाड़ियों को टोल टैक्स से छूट

नई व्यवस्था के अनुसार, सिर्फ प्राइवेट इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर ही नहीं बल्कि प्राइवेट इलेक्ट्रिक बसों को भी इस छूट का लाभ मिलेगा। पीटीआई के अनुसार, इस साल मई में गृह विभाग ने अटल सेतु पर इलेक्ट्रिक कार और बसों को टोल से छूट देने का फैसला किया था। अब नए आदेश से यह छूट शिवाजी नगर और गवन टोल प्लाजा पर भी लागू होगी। यह कदम राज्य सरकार की ई-मोबिलिटी नीति को बढ़ावा देने और प्रदूषण कम करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

गौरतलब है कि अटल सेतु का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2024 में किया था। यह पुल दक्षिण मुंबई के शिवड़ी को नवी मुंबई के न्हावा शेवा से जोड़ता है। पुल शुरू होने के बाद मुंबई और नवी मुंबई के बीच कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार हुआ है। साथ ही मुंबई और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, मुंबई बंदरगाह, जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह के अलावा मुंबई से पुणे, गोवा और दक्षिण भारत के राज्यों की यात्रा में समय की बचत हो रही है।

यह पुल छह लेन वाला है और कुल 21.8 किलोमीटर लंबा है, जिसमें से 16.5 किलोमीटर हिस्सा समुद्र के ऊपर और 5.5 किलोमीटर हिस्सा ज़मीन पर है। इसे बनाने में 17,840 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई। प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी आधारशिला दिसंबर 2016 में रखी थी। अब इलेक्ट्रिक गाड़ियों को टोल टैक्स से छूट देने के फैसले को न केवल ट्रैफिक प्रबंधन बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक कदम माना जा रहा है।