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महाराष्ट्र: ‘सर, मुझे पढ़ना है’, और एक पत्र ने बचा लिए 10 वीं की छात्रा के सपने, प्रशासन ने रुकवाया बाल विवाह

Written by:Banshika Sharma
Published:
महाराष्ट्र के हिंगोली में 10वीं कक्षा की एक छात्रा ने हिम्मत दिखाते हुए अपने प्रिंसिपल को चिट्ठी लिखकर अपना बाल विवाह रुकवा दिया। छात्रा ने पत्र में आगे पढ़ने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप कर परिवार को समझाया और शादी टाल दी गई।
महाराष्ट्र: ‘सर, मुझे पढ़ना है’, और एक पत्र ने बचा लिए 10 वीं की छात्रा के सपने, प्रशासन ने रुकवाया बाल विवाह

महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में 10वीं कक्षा की एक छात्रा की बहादुरी और सूझबूझ ने उसका भविष्य संवार दिया। जब परिवार ने उसकी शादी एक 25 वर्षीय युवक से तय कर दी, तो उसने हार नहीं मानी। अपनी पढ़ाई जारी रखने की जिद में उसने स्कूल के प्रिंसिपल को एक चिट्ठी लिखी, जिसमें सिर्फ एक गुहार थी — “सर, मुझे पढ़ना है, मेरी शादी रुकवा दीजिए।”

इस एक चिट्ठी ने पूरे प्रशासनिक महकमे को हरकत में ला दिया और समय रहते एक नाबालिग को बाल विवाह के बंधन में बंधने से बचा लिया गया।

प्रिंसिपल को लिखी चिट्ठी और फिर…

प्रिंसिपल को लिखी चिट्ठी और फिर...

मामला हिंगोली जिले के एक गांव का है, जहां 15 वर्षीय छात्रा के परिवार ने उसकी शादी की तैयारियां शुरू कर दी थीं। छात्रा इस फैसले से परेशान थी क्योंकि वह अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती थी। जब उसे कोई रास्ता नहीं सूझा, तो उसने अपने स्कूल के प्रिंसिपल से मदद मांगने का फैसला किया।

“सर, मुझे पढ़ना है, मेरी शादी रुकवा दीजिए।”

छात्रा के इस मार्मिक पत्र को प्रिंसिपल ने बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने बिना देरी किए मामले की सूचना तत्काल जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग को दी।

प्रशासन ने परिवार को समझाया कानून

सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग की एक टीम फौरन छात्रा के गांव पहुंची। अधिकारियों ने उसके परिजनों से मुलाकात की और उन्हें बाल विवाह की कानूनी जटिलताओं के बारे में समझाया। टीम ने परिवार को बताया कि नाबालिग की शादी करना एक गंभीर अपराध है और बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत उन पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

इसके अलावा, अधिकारियों ने परिवार की काउंसलिंग की और उन्हें बेटी की शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया। प्रशासनिक हस्तक्षेप और कानूनी कार्रवाई के डर से परिजन अपनी गलती मानने को तैयार हो गए और उन्होंने शादी रोकने पर सहमति जताई।

अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित किया कि छात्रा की पढ़ाई में कोई बाधा न आए और वह नियमित रूप से स्कूल जाए। प्रशासन ने इस मामले को शिक्षा और जागरूकता अभियानों की सफलता बताया, जिसके कारण आज बच्चे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का साहस कर पा रहे हैं। फिलहाल, विभाग इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है।