महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला, जिसका मुख्य कारण नीट और टीईटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामले थे। इन घटनाओं को लेकर विपक्ष ने सरकार पर जोरदार हमला बोला, जिससे सदन में गहमागहमी का माहौल रहा।
कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बार-बार हो रही पेपर लीक की घटनाओं से न केवल महाराष्ट्र की पूरे देश में बदनामी हो रही है, बल्कि लाखों छात्रों और शिक्षकों का भविष्य भी अधर में लटक गया है। वडेट्टीवार ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल उठाया और पूछा कि आखिर सरकार बार-बार इन परीक्षाओं को पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से आयोजित करने में क्यों विफल साबित हो रही है। उन्होंने इस विफलता को छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।
मामले पर स्थगन प्रस्ताव लाने की मांग
सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, विपक्ष ने तत्काल इस गंभीर मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाने की मांग की। चर्चा के दौरान, विजय वडेट्टीवार ने अपनी बात रखते हुए कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक कड़ी मेहनत और लगन से तैयारी करते हैं, जिसके बाद वे इन महत्वपूर्ण परीक्षाओं में शामिल होते हैं। लेकिन पेपर लीक की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के कारण उनकी सारी मेहनत और उम्मीदों पर पानी फिर जाता है। उन्होंने सरकार से इस स्थिति के लिए जवाबदेही तय करने को कहा।
टीईटी पेपर लीक मामले में गहन जांच की मांग
हालिया टीईटी पेपर लीक मामले की गहन जांच की मांग करते हुए वडेट्टीवार ने स्पष्ट किया कि केवल कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए पेपर तैयार करने वाली एजेंसियों, संबंधित कंपनियों और इसके पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच होनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने बताया कि अब तक इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन जांच में उनके दूसरे राज्यों से भी संबंध सामने आ रहे हैं, जो इस मामले की गंभीरता को और अधिक बढ़ा देता है।
2018 के टीईटी घोटाले का विधानसभा में उठा मुद्दा
वडेट्टीवार ने वर्ष 2018 के टीईटी घोटाले का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि उस मामले के आरोपी अभिषेक सावरीकर को बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल कर लिया गया था। इसके साथ ही, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि इस तरह के मामलों में बार-बार ‘क्रिस्टल’ नामक कंपनी का नाम क्यों सामने आ रहा है। उन्होंने सरकार की भूमिका पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि इन लगातार सामने आ रही घटनाओं और संबंधित तथ्यों से यह संदेह पैदा होता है कि कहीं यह कोई सरकार प्रायोजित घोटाला तो नहीं है, जो छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है।
दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग
वडेट्टीवार ने सरकार से मांग की कि दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए ठोस एवं मजबूत व्यवस्था लागू की जाए, ताकि छात्रों का सरकार और परीक्षा प्रणाली पर विश्वास बहाल हो सके। हालांकि, विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इस अत्यंत गंभीर मुद्दे पर कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब देने में पूरी तरह विफल रही। इसके अलावा, विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर भी नहीं दिया गया। इसके विरोध में महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर सरकार के खिलाफ अपना तीव्र विरोध दर्ज कराया। पेपर लीक के मुद्दे को लेकर विधानसभा में हुई इस तीखी राजनीतिक तकरार ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और सरकार की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।






