बैंकिंग सेक्टर में नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने जून में फिर सख्ती दिखाई है। तीन सहकारी बैंकों पर जुर्माना लगाया गया है, जो पंजाब, कर्नाटक और हैदराबाद में स्थित हैं। इस कार्रवाई की जानकारी आरबीआई ने 29 जून को अपनी आधिकारिक वेबसाइट http://www.rbi.org.in पर दी है।
हैदराबाद में स्थित श्री भारती को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड पर आरबीआई ने 1.50 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई है। वहीं कर्नाटक में स्थित द चिकमगलूर डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। पंजाब के जालंधर में स्थित द सिटीजंस अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 5 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है।
2025 में आरबीआई ने किया था निरीक्षण
बैंकों के वित्तीय स्थिति को जानने के लिए आरबीआई/नाबार्ड ने 31 मार्च 2025 तक एक संवैधानिक निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के दौरान दिशानिर्देशों के अनुपालन में खामियों का पता चला। इसके बाद बैंकों को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया। इस पर मिली प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक प्रस्तुतियों के आधार पर आरोप सही साबित होने पर पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया।
क्या है कारण?
श्री भारती को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड ने निदेशकों से जुड़े लोन स्वीकृत किए। यह सुनिश्चित करने में भी नाकाम रहा कि 31 मार्च 2025 तक छोटे मूल्य के लोन, कुल लोन और एडवांस का कम से कम 40% हो। द चिकमगलूर डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड ने निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए थे। द सिटीजंस अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने कुछ नाम मात्र सदस्यों को रेगुलेटरी सीमा से ज्यादा लोन मंजूर किए। कोर बैंकिंग सॉल्यूशन को एक्सेस करने के लिए टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करने में भी विफल रहा।
ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर
भारतीय रिजर्व बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। बैंक ने कहा कि तीनों बैंकों के खिलाफ की गई कार्रवाई विनियामक खामियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य ग्राहकों और बैंकों के बीच हो रहे किसी भी ट्रांजेक्शन या एग्रीमेंट की वैधता पर प्रभाव डालना नहीं है। न ही भविष्य में होने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर इसका कोई असर पड़ेगा।






