महाराष्ट्र विधान परिषद में बुधवार को माहौल उस वक्त भावुक हो गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सदस्य के तौर पर अपना विदाई भाषण दिया। मई महीने में सेवानिवृत्त हो रहे 9 सदस्यों के लिए आयोजित विदाई समारोह में बोलते हुए ठाकरे ने कहा कि उनका स्वभाव राजनीति का नहीं, बल्कि एक कलाकार का है। इस दौरान उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल को याद करते हुए मौजूदा सरकार से तीन बड़ी मांगें भी कीं।

उद्धव ठाकरे के साथ नीलम गोह्रे, अमोल मिटकरी और शशिकांत शिंदे समेत अन्य सदस्य भी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ठाकरे ने अपने संबोधन की शुरुआत में ही स्पष्ट किया कि वे मूल रूप से एक कलाकार हैं और राजनीति में आना एक अलग परिस्थिति थी।

“मेरा स्वभाव राजनीति का नहीं, बल्कि एक कलाकार का है। जब लोग मुझे इतने अच्छे से जानते हैं, तो फिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति बनी कि मुझे किसी का हाथ पकड़ना पड़ा।” — उद्धव ठाकरे

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर जब वह सदन में आए, तो कई जिम्मेदारियां अचानक सामने आ गईं, जिनसे भागना सही नहीं था। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान साथ देने के लिए मंत्रिमंडल के सहयोगियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस और स्वास्थ्यकर्मियों का आभार व्यक्त किया।

‘युवा शक्ति’ पर जोर, ढोंगी बाबाओं पर निशाना

अपने भाषण में उद्धव ठाकरे ने युवाओं की ताकत को देश का भविष्य बताया। उन्होंने कहा कि नेताओं को ‘बुवा शक्ति’ (ढोंगी बाबाओं) की बजाय ‘युवा शक्ति’ को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “असली चमत्कार कोई बाबा नहीं, बल्कि देश के युवा कर सकते हैं।” यह टिप्पणी मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक बहसों पर एक कटाक्ष के रूप में देखी जा रही है।

सरकार के सामने रखीं 3 प्रमुख मांगें

भले ही वह अब सदन का हिस्सा नहीं रहेंगे, लेकिन उन्होंने महाराष्ट्र के विकास के लिए सरकार के सामने तीन महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इन मांगों में शामिल हैं:

1. मुंबई में मराठी भाषा भवन का निर्माण।
2. चौपाटी पर मराठी रंगभूमि गैलरी की स्थापना।
3. वर्ली डेयरी की जगह पर एक विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र का विकास।

इसके अलावा, उन्होंने विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति की भी मांग उठाई, जो काफी समय से लंबित है।

कार्यकाल को किया याद, अजित पवार का भी जिक्र

उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री बनने के बाद मंत्रालय में प्रवेश के दिन और ‘वर्षा’ बंगला छोड़ते समय मिले लोगों के प्यार को याद किया। उन्होंने कहा कि वह स्नेह अविस्मरणीय था। उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां भी गिनाईं, जिनमें औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर करना, किसान कर्ज माफी, शिवभोजन थाली और कोविड के दौरान मुंबई मॉडल की सफलता शामिल है।

भाषण के दौरान उन्होंने उपमुख्यमंत्री अजित पवार का भी जिक्र किया। ठाकरे ने कहा कि अजित पवार ने हमेशा मजबूती से उनका साथ दिया और अच्छे कामों में कभी कोई बाधा नहीं डाली। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन मुलाकातें होती रहनी चाहिए।