महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में पिछले एक हफ्ते से लगातार बारिश हो रही है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। कई जिलों में बड़े पैमाने पर वित्तीय हानि हुई है और अब तक आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें लातूर में तीन, धाराशिव में एक, बीड में दो और नांदेड में दो लोगों की जान गई है। भारी बारिश और बाढ़ से खेत-खलिहान जलमग्न हो गए हैं, फसलें बह गई हैं और कई गांवों का संपर्क टूट गया है। इस स्थिति को लेकर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार से तुरंत मदद का ऐलान करने की अपील की है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि अतिवृष्टि और बाढ़ से बर्बाद हुई खेती को बचाने के लिए केंद्र सरकार को कम से कम 10,000 करोड़ रुपये की तत्काल सहायता घोषित करनी चाहिए। उन्होंने मांग रखी कि किसानों के बैंक खातों में सीधे मुआवजा जमा कराया जाए और बाद में उसकी जांच की जाए। ठाकरे ने कहा कि अभी सबसे बड़ी जरूरत समय पर मदद पहुंचाने की है, न कि पंचनामों और कागजी प्रक्रिया में वक्त गवाने की।
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उद्धव ठाकरे ने केंद्र से की मदद मांगी
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने बैंकों को भी लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बैंकों को निर्देश दिया जाना चाहिए कि किसानों के खातों से कर्ज की किस्तों की कटौती न करें। ठाकरे ने पुराने नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल दो हेक्टेयर तक ही सहायता देने की परंपरा को खत्म कर इसे तीन हेक्टेयर तक बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को राहत मिले और बाद में विस्तृत छानबीन की जाए।
मराठवाड़ा के बीड, लातूर, धाराशिव, जालना, संभाजीनगर, नांदेड और परभणी जैसे जिले, जहां अक्सर सूखे की मार पड़ती है, वहां इस बार भारी बारिश ने पूरी खरीफ फसल बर्बाद कर दी है। लाखों हेक्टेयर जमीन जलमग्न हो गई है, पशुधन बह गया है और सड़कें ध्वस्त हो गई हैं। ठाकरे ने कहा कि हालात इतने खराब हैं कि अब रबी की फसल भी खतरे में पड़ गई है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च करने वाली सरकार ने किसानों की मदद के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
उद्धव ठाकरे ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि महाविकास आघाड़ी सरकार के समय भी केंद्र ने सूखा, चक्रवात और अतिवृष्टि जैसी आपदाओं में पर्याप्त सहायता नहीं दी थी। ठाकरे ने आरोप लगाया कि मौजूदा महायुति सरकार भी मराठवाड़ा के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा कि एक भी मंत्री ने बांधों का दौरा कर स्थिति का जायजा नहीं लिया। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री हेलिकॉप्टर से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने की बजाय मंत्रालय के आपदा प्रबंधन कक्ष में बैठकर टीवी देख रहे हैं और “टेबल न्यूज़” तैयार कर रहे हैं।