मुंबई की महापौर रितु तावडे ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसा दावा किया है जिसने पूरे शहर में चर्चा छेड़ दी है। दरअसल उन्होंने कहा कि वह पिछले दो साल से गले की एक गंभीर समस्या से परेशान थीं, जिसकी वजह से उनकी आवाज पहले जैसी नहीं रही थी। लेकिन कई तरह के इलाज और दवाइयों के बावजूद जब कोई फायदा नहीं हुआ, तब एक ‘गुरुदेव’ के आशीर्वाद से उन्हें राहत मिली और उनकी आवाज वापस आ गई। तावडे ने बोरीवली में आयोजित एक कार्यक्रम में अपना यह अनुभव साझा किया, जिसके बाद चिकित्सा जगत और आम लोगों के बीच आस्था और विज्ञान को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
वहीं महापौर तावडे ने कार्यक्रम में मौजूद सैकड़ों लोगों को संबोधित करते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि करीब दो साल तक गले की इस बीमारी ने उन्हें काफी परेशान किया और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित होने लगी थी। उनकी आवाज में भारीपन आ गया था और बोलने में दिक्कत होती थी। एक सार्वजनिक प्रतिनिधि होने के नाते उनका काम लोगों से लगातार बातचीत करना होता है, ऐसे में आवाज का प्रभावित होना उनके लिए बड़ी परेशानी बन गया था। उन्होंने अपनी समस्या के समाधान के लिए कई विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह ली, नियमित रूप से दवाएं भी लीं और डॉक्टरों द्वारा बताए गए सभी इलाज भी करवाए। हालांकि इन सब कोशिशों के बावजूद उनकी हालत में कोई खास सुधार नहीं हो रहा था। आवाज की समस्या बनी रही और वे लगातार मानसिक तनाव से गुजर रही थीं।
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इलाज के बावजूद सुधार न होने से उन्हें काफी निराशा हो गई थी
दरअसल जब मेडिकल इलाज से कोई खास राहत नहीं मिली और वे अपनी समस्या से पूरी तरह निराश हो गईं, तब उन्होंने अपनी परेशानी एक ‘परम गुरुदेव’ के सामने रखी। तावडे के मुताबिक उस समय वे शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी काफी कमजोर महसूस कर रही थीं। इलाज के बावजूद सुधार न होने से उन्हें काफी निराशा हो गई थी। उन्होंने एक जैन पुजारी का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हीं के आशीर्वाद के बाद उनकी हालत में अचानक सुधार शुरू हुआ। यह उनके लिए ऐसा अनुभव था जिसकी उन्होंने पहले कभी कल्पना भी नहीं की थी।
महापौर तावडे हुई भावुक
अपने इस अनुभव को बताते हुए महापौर तावडे भावुक भी हो गईं। उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया और आज मैं आपके सामने पूरी तरह ठीक होकर अपनी असली आवाज में बोल पा रही हूं। पहले मैं बहुत परेशान थी, बोलते समय आवाज लड़खड़ा जाती थी, लेकिन अब मेरी आवाज पूरी तरह वापस आ गई है।” महापौर जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का ऐसा दावा समाज में बड़ा संदेश देता है। यह उन लोगों को भी सोचने पर मजबूर करता है जो अपनी बीमारी के इलाज के लिए सिर्फ चिकित्सा विज्ञान पर निर्भर रहते हैं। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी चर्चा बढ़ा दी है, जहां कुछ लोग इसे आस्था की शक्ति मान रहे हैं तो कुछ लोग इसे विज्ञान की नजर से देख रहे हैं।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा भी मौजूद थे
इसी कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा भी मौजूद थे। उन्होंने भी महापौर तावडे के इस दावे का समर्थन किया और इसे उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण अनुभव बताया। मंत्री लोढ़ा ने अपने संबोधन में कहा कि गुरुदेव का आशीर्वाद मिलने के बाद ही रितु तावडे के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगे। उन्होंने यह भी कहा कि आस्था और विश्वास में बहुत शक्ति होती है, जो कई बार विज्ञान से परे जाकर भी असर दिखाती है।
मंत्री लोढ़ा ने अपने बयान में महापौर रितु तावडे की राजनीतिक यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता अमित साटम ने उन्हें बताया था कि गुरुदेव से मिलने के बाद ही रितु तावडे के राजनीतिक करियर में तेजी आई। साटम के मुताबिक गुरुदेव के आशीर्वाद के बाद ही तावडे पहले पार्षद बनीं और बाद में मुंबई जैसे बड़े शहर की महापौर बनीं। लोढ़ा ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री अमित शाह जैसे शीर्ष नेताओं के समर्थन और आशीर्वाद के बाद ही उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी मिली। यह बयान राजनीति में आध्यात्मिक प्रभाव और बड़े नेताओं के समर्थन की भूमिका को भी दिखाता है।