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कौन हैं अश्विनी भिड़े? जो बनीं मुंबई BMC की पहली महिला कमिश्नर, जानें कैसा रहा इनका प्रशासनिक सफर

Written by:Gaurav Sharma
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अश्विनी भिड़े ने मंगलवार को मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के कमिश्नर पद की जिम्मेदारी संभाली। बीएमसी के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी महिला अधिकारी को इस शीर्ष पद की कमान मिली है। 'मुंबई की मेट्रो वुमन' के नाम से मशहूर भिड़े, अपनी तेज गति और जटिल समस्याओं के समाधान के अनुभव के लिए जानी जाती हैं।
कौन हैं अश्विनी भिड़े? जो बनीं मुंबई BMC की पहली महिला कमिश्नर, जानें कैसा रहा इनका प्रशासनिक सफर

अश्विनी भिड़े ने मंगलवार को मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के कमिश्नर का पदभार संभाल लिया है। यह बीएमसी के 137 साल से भी अधिक के इतिहास में पहली बार हुआ है जब किसी महिला अधिकारी को इस शीर्ष प्रशासनिक पद की कमान सौंपी गई है। 1995 बैच की आईएएस अधिकारी अश्विनी भिड़े ने निवर्तमान कमिश्नर भूषण गगरानी का स्थान लिया है, जो आज ही सेवानिवृत्त हुए हैं। उनकी यह नियुक्ति मुंबई के प्रशासनिक हलकों में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है, खासकर इसलिए क्योंकि भिड़े को शहर की जटिल समस्याओं को सुलझाने और तेजी से काम करने वाली एक कुशल अधिकारी के रूप में जाना जाता है।

मुंबई जैसे महानगर की सबसे बड़ी नागरिक संस्था की बागडोर संभालना एक विशाल चुनौती और बड़ी जिम्मेदारी है। बीएमसी देश के सबसे धनी नगर निगमों में से एक है, जिसका सालाना बजट कई छोटे राज्यों से भी अधिक होता है। इस पद के लिए अश्विनी भिड़े के चयन से पहले संजय मुखर्जी और असीम गुप्ता जैसे कई दिग्गज और अनुभवी अधिकारियों के नामों पर गहन विचार किया गया था। लेकिन, अंततः अश्विनी भिड़े के व्यापक अनुभव, उनकी मजबूत प्रशासनिक छवि और खास तौर पर मुंबई की शहरी संरचना की गहरी समझ को देखते हुए यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई। उनकी नियुक्ति इस बात का भी स्पष्ट संकेत देती है कि राज्य सरकार मुंबई की बढ़ती शहरी चुनौतियों से निपटने के लिए एक ऐसे नेतृत्व पर भरोसा कर रही है जो प्रभावी और परिणामोन्मुखी हो, साथ ही ऐतिहासिक रूप से पुरुष-प्रधान रहे इस पद पर लैंगिक समानता का एक नया अध्याय भी लिख रही है।

अश्विनी भिड़े: एक परिचय और प्रशासनिक सफर

अश्विनी भिड़े का जन्म महाराष्ट्र के सांगली जिले में हुआ था, और उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने इंग्लिश लिटरेचर में पोस्टग्रेजुएट की डिग्री हासिल की है और इसके अतिरिक्त उन्होंने एमबीए भी किया है, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है। सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 9वीं रैंक हासिल की थी। यह उनकी असाधारण बुद्धिमत्ता और समर्पण का प्रमाण है, जो उन्हें देश के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की श्रेणी में रखता है।

उनके करियर का पहला असाइनमेंट कोल्हापुर के असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में था, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कार्य और जनता की समस्याओं को करीब से समझने का अनुभव प्राप्त किया। इसके बाद, उन्होंने सिंधुदुर्ग और नागपुर जैसे जिलों में जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में कार्य किया। इन पदों पर रहते हुए, अश्विनी भिड़े ने विशेष रूप से जल प्रबंधन और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके नवाचारों और प्रभावी नीतियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता सुधारने में मदद की और उन्हें इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता के लिए व्यापक पहचान मिली।

भिड़े ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएमआरडीए) के अतिरिक्त महानगरीय आयुक्त के रूप में भी काम किया है। एमएमआरडीए मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़े पैमाने की विकास परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें लागू करने वाली एक प्रमुख संस्था है। इस भूमिका ने उन्हें शहरी नियोजन और बड़े पैमाने के बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के प्रबंधन का गहरा अनुभव दिया। इससे पहले, वह राज्यपाल की उप सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुकी थीं, जिससे उन्हें राज्य के शीर्ष राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे की आंतरिक कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रियाओं को समझने का मौका मिला। हाल ही में, कोविड-19 महामारी के चुनौतीपूर्ण और अभूतपूर्व दौर में, अश्विनी भिड़े बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त के रूप में भी सक्रिय रही थीं। इस दौरान उन्होंने शहर की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और महामारी प्रबंधन रणनीतियों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह अनुभव उन्हें बीएमसी की आंतरिक कार्यप्रणाली, मुंबई की नागरिक आवश्यकताओं और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की गहरी समझ प्रदान करता है, जो उन्हें कमिश्नर के रूप में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।

‘मेट्रो वुमन’ के नाम से क्यों मशहूर हैं अश्विनी भिड़े

अश्विनी भिड़े को ‘मुंबई की मेट्रो वुमन’ के नाम से विशेष पहचान मिली है, और यह खिताब उन्होंने अपने असाधारण कार्य से अर्जित किया है। यह पहचान उन्हें 2015 से 2020 के बीच मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल) के प्रबंध निदेशक के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान मिली। इस अवधि में उन्होंने मुंबई की सबसे महत्वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में से एक, कोलाबा-बांद्रा-सीप्ज लाइन (मेट्रो-3) परियोजना को लागू करने में महत्वपूर्ण और निर्णायक भूमिका निभाई।

यह परियोजना मुंबई जैसे घनी आबादी वाले और जगह की कमी वाले शहर के लिए एक भूमिगत रेल परियोजना थी, जिसे लागू करने में कई असाधारण चुनौतियां थीं। इन चुनौतियों में शहरी क्षेत्रों में व्यापक भूमि अधिग्रहण, घनी आबादी के बीच निर्माण संबंधी जटिलताएं, भूमिगत खुदाई की तकनीकी बाधाएं और सबसे बढ़कर पर्यावरणीय चिंताएं शामिल थीं। मेट्रो-3 मार्ग के निर्माण के दौरान, विशेष रूप से आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों के बीच बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। यह एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बन गया था, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं।

अश्विनी भिड़े ने इन सभी संवेदनशील मुद्दों को बेहद संजीदगी, कुशलता और दृढ़ता से संभाला। उन्होंने विभिन्न हितधारकों, जिनमें प्रभावित नागरिक, पर्यावरण समूह और राजनीतिक नेता शामिल थे, के साथ लगातार संवाद स्थापित किया। उन्होंने उनकी चिंताओं को धैर्यपूर्वक सुना और परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए व्यवहार्य समाधान खोजने का प्रयास किया। उनकी दूरदर्शिता, संकट प्रबंधन क्षमता और दृढ़ संकल्प के कारण ही यह परियोजना अपनी गति पर बनी रही। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि मुंबई को एक आधुनिक और कुशल सार्वजनिक परिवहन प्रणाली मिले, जो शहर की बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा कर सके। मेट्रो परियोजना को इस तरह की चुनौतियों के बावजूद सफलतापूर्वक आगे बढ़ाना ही उन्हें ‘मेट्रो वुमन’ का खिताब दिलाता है।

बीएमसी कमिश्नर के रूप में अश्विनी भिड़े के सामने बड़ी चुनौतियां

बीएमसी कमिश्नर के रूप में अश्विनी भिड़े के सामने अब मुंबई की कई प्रमुख और दीर्घकालिक समस्याएं होंगी। इनमें मानसून के दौरान शहर में हर साल होने वाला जलभराव, बुनियादी ढांचे का लगातार विकास, शहर की सफाई और कचरा प्रबंधन, वायु और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण, झुग्गी बस्तियों का पुनर्विकास और बीएमसी के वित्तीय स्वास्थ्य को और मजबूत करना शामिल है। उनकी पिछली भूमिकाओं में दिखाया गया तेज गति से काम करने का तरीका और जटिल चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता, मुंबई को बेहतर बनाने की उम्मीद जगाती है। शहरी विकास, जल प्रबंधन, ग्रामीण विकास और बड़े पैमाने की परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन का उनका व्यापक अनुभव बीएमसी के लिए एक बड़ी पूंजी साबित होगा। शहर के लोग और प्रशासन अब उनसे उम्मीद कर रहे हैं कि वे मुंबई को एक स्वच्छ, सुरक्षित, अधिक लचीला और अधिक रहने योग्य महानगर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण और स्थायी कदम उठाएंगी, जिससे देश की आर्थिक राजधानी की चमक और बढ़ेगी।

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