बंगाल के चंद्रकोना में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी रैली को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ने बंगाल की मतदाता सूची में अवैध मतदाताओं को शामिल करने के लिए 30 हजार से ज़्यादा ‘फॉर्म 6’ के आवेदन जमा किए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोशिश बिहार, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे बीजेपी-शासित राज्यों से हजारों ऐसे लोगों को बंगाल की वोटर लिस्ट में शामिल करवाने की है, जो असल में यहां के स्थायी निवासी नहीं हैं। ममता बनर्जी ने इसे बंगाल के लोकतंत्र पर कब्जा करने की एक गहरी साजिश बताया।
मुख्यमंत्री ने इस ‘साजिश’ के पीछे के समय और तरीके को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि यह पूरी कवायद तब की गई, जब राज्य में मतदाता सूची से नाम काटे जाने को लेकर पहले से ही भारी चिंता थी। उस दौरान लगभग 60 लाख वोटर कानूनी जांच-पड़ताल में फंसे हुए थे और उनके लोकतांत्रिक अधिकार दांव पर लगे थे। ठीक इसी अफरा-तफरी और अनिश्चितता के माहौल का फायदा उठाते हुए, बीजेपी ने पर्दे के पीछे एक सोची-समझी रणनीति के तहत ये हजारों ‘फॉर्म 6’ के आवेदन जमा किए। उनका मकसद था कि इस बड़े पैमाने पर हो रही हेरफेर पर किसी का ध्यान न जाए और चुपचाप अपने एजेंडे को अंजाम दिया जा सके।
ममता बनर्जी ने बीजेपी पर लगाया लोगों को धर्म के आधार पर बांटने का आरोप
ममता बनर्जी ने बीजेपी पर बंगाल के लोगों को धर्म के आधार पर बांटने और राज्य की पहचान का अपमान करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी सिर्फ बाहरी अवैध मतदाताओं को जोड़ने का प्रयास ही नहीं कर रही, बल्कि वह चुनिंदा रूप से महिलाओं और अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा भी रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अगर उनकी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सरकार मजबूती से खड़ी न होती, तो बीजेपी बंगाल की मतदाता सूची से पांच करोड़ मतदाताओं के नाम हटा देती। उन्होंने अपनी सरकार की सतर्कता और दृढ़ता को इस बड़े खतरे से राज्य को बचाने का श्रेय दिया।
रैली में मौजूद लोगों से ममता बनर्जी ने भावुक अपील करते हुए कहा, “मुझे ही बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीट पर अपना उम्मीदवार समझें।” उन्होंने मतदाताओं से अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को अपना समर्थन देने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने बंगाल के लोगों को यह भी भरोसा दिलाया कि जब तक तृणमूल कांग्रेस राज्य की सत्ता में है, तब तक बंगाल में न तो कोई डिटेंशन सेंटर स्थापित किया जाएगा और न ही राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये दोनों मुद्दे बंगाल के लोगों के लिए संवेदनशील हैं और उनकी सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए ममता बनर्जी ने एक और विवादास्पद दावा किया। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी बंगाल में सत्ता में आती है, तो वह राज्य में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगा देगी। मुख्यमंत्री के इस बयान को बीजेपी पर सांस्कृतिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता में दखलंदाजी के आरोप के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी का यह कदम बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और खान-पान की आदतों पर सीधा हमला होगा, जो राज्य की विविधता और परंपराओं के खिलाफ है।
लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर करने का प्रयास
मुख्यमंत्री ने ‘फॉर्म 6’ के आवेदनों को “एक पूरी तरह से सोच-समझकर किया गया ऑपरेशन” बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल कुछ नामों को जोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि यह बंगाल के लोकतंत्र की बुनियाद को ही भ्रष्ट करने और उस पर अपना राजनीतिक कब्ज़ा जमाने का एक बड़ा प्रयास है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को विकृत करके सत्ता हासिल करना चाहती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं।
“इसका मकसद बंगाल के लोकतंत्र की बुनियाद को ही भ्रष्ट करके उस पर अपना राजनीतिक कब्ज़ा जमाना था।” (ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल)
ममता बनर्जी की नागरिकों से खास अपील
ममता बनर्जी ने बंगाल के हर नागरिक से इस गंभीर खतरे के प्रति पूरी तरह से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे अपने-अपने इलाकों में बीजेपी की गतिविधियों पर पैनी नजर रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें। मुख्यमंत्री ने सभी से आह्वान किया कि वे बंगाल की लोकतांत्रिक आजादी को छीनने और उसकी सांस्कृतिक पहचान को मिटाने की इस कथित साजिश के खिलाफ एकजुट होकर मजबूती से खड़े हों। उन्होंने जोर देकर कहा कि बंगाल की जनता को अपने अधिकारों, स्वतंत्रता और पहचान की रक्षा के लिए आवाज उठानी होगी।
ये आरोप बंगाल में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को और गरमा देंगे। मतदाता सूची में हेरफेर और बाहरी मतदाताओं को शामिल करने के दावे चुनाव आयोग के लिए भी एक बड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से बीजेपी पर बाहरी लोगों को बंगाल में लाकर स्थानीय पहचान को कमजोर करने का आरोप लगाती रही है। अब 30 हजार से अधिक ‘फॉर्म 6’ के आवेदनों की बात सामने आने के बाद यह मुद्दा और अधिक प्रासंगिक हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये आरोप मतदाताओं के बीच एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ सकते हैं और आगामी चुनावों में इसका असर दिख सकता है। बीजेपी की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है और चुनाव आयोग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है, यह देखना अहम होगा।





