असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर एक बड़ा और आत्मविश्वासपूर्ण दावा किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य की 126 सीटों में से 96 से 100 सीटें जीतकर एक बार फिर सत्ता में लौटेगी। मुख्यमंत्री ने अपनी भविष्यवाणी में विपक्षी दलों को भी शामिल किया, जहां उन्होंने कांग्रेस के लिए 15 से 20 सीटें और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के लिए 5 से 6 सीटें मिलने का अनुमान लगाया। सरमा ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भाजपा सरकार दोबारा बनती है, तो तीन महीने के भीतर राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दी जाएगी। असम में 9 अप्रैल को मतदान होना है और वोटों की गिनती 4 मई को होगी।
भाजपा के घोषणापत्र में 31 प्रमुख वादे शामिल
चुनाव से पहले, भाजपा ने अपना बहुप्रतीक्षित घोषणापत्र ‘संकल्प पत्र’ जारी किया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे जारी करते हुए बताया कि इसमें 31 प्रमुख वादे शामिल हैं। इन वादों में कुछ सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं ‘बांग्लादेशी मियां’ द्वारा कथित रूप से अतिक्रमण की गई जमीन को वापस लेना, पूरे राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करना और युवाओं के लिए व्यापक रोजगार के अवसर पैदा करना। ये तीनों मुद्दे असम की पहचान, जनसांख्यिकी और आर्थिक स्थिरता से सीधे जुड़े हैं, और राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में इनकी अहमियत हमेशा से रही है।
असम में यूसीसी लागू करने का बीजेपी का बड़ा वादा
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) भाजपा के राष्ट्रीय एजेंडे का एक प्रमुख हिस्सा है, और असम में इसे लागू करने का वादा मुख्यमंत्री सरमा ने विशेष जोर देकर किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सत्ता में वापस आते ही, तीन महीने के भीतर यूसीसी को राज्य में प्रभावी ढंग से लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यह घोषणा न केवल भाजपा के हिंदुत्ववादी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि इसका उद्देश्य विभिन्न समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता लाकर समाज में समानता को बढ़ावा देना भी है। असम जैसे विविधतापूर्ण राज्य में, जहां कई जातीय और धार्मिक समूह निवास करते हैं, यूसीसी का मुद्दा संवेदनशील और चर्चा का विषय बना हुआ है।
मुख्यमंत्री ने अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ अपनी सरकार की कठोर नीति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार कानूनी रूप से उन सभी जमीनों को वापस लेगी जिन पर बांग्लादेशी घुसपैठियों ने कब्जा कर लिया है। यह मुद्दा असम के मूल निवासियों के लिए गहरा महत्व रखता है, क्योंकि वे लंबे समय से भूमि अतिक्रमण और जनसांख्यिकीय बदलावों को लेकर चिंतित रहे हैं। सरमा ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इन घुसपैठियों को बेदखल करेगी और “उनके चंगुल से जमीन का एक-एक इंच वापस लेगी”। यह बयान सरकार के भूमि संरक्षण और मूल निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा के प्रति दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री का घुसपैठियों पर स्पष्ट रुख
घुसपैठियों की समस्या पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का रुख बेहद साफ था। जब उनसे पूछा गया कि राज्य से घुसपैठियों को हटाने में कितना समय लगेगा, तो उन्होंने कहा, “जब तक बांग्लादेश का अस्तित्व है, घुसपैठिए आते रहेंगे और हमें उनसे लड़ना होगा।” यह बयान इस समस्या की दीर्घकालिक और जटिल प्रकृति को उजागर करता है, और साथ ही यह भी दर्शाता है कि सरकार इसे एक सतत चुनौती मानती है जिसके लिए निरंतर सतर्कता और कार्रवाई की आवश्यकता होगी। यह समस्या केवल एक चुनावी वादा नहीं, बल्कि असम की सुरक्षा और पहचान से जुड़ा एक मौलिक मुद्दा है।
असम में पिछले 10 साल से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार है, जिसमें भाजपा प्रमुख साझेदार है। यह स्थिर सरकार राज्य में विकास और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का दावा करती रही है। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 20 मई 2026 तक निर्धारित है, और ये चुनाव एनडीए के लिए अपनी विकास यात्रा को जारी रखने और अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर हैं। राज्य में भाजपा ने अपनी नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से जनता के बीच अपनी पैठ बनाई है, और इस चुनाव में वे अपनी उपलब्धियों को भुनाने की कोशिश करेंगे।
पिछली बार, यानी 2021 के विधानसभा चुनाव में, असम में तीन चरणों में मतदान हुआ था। उस चुनाव में एनडीए गठबंधन, जिसमें भाजपा, असम गण परिषद (एजीपी) और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) शामिल थे, ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 75 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाले महाजोत गठबंधन को 50 सीटों पर सफलता मिली थी। बहुमत का आंकड़ा 64 सीटें है, जिसे एनडीए ने पिछली बार आसानी से पार कर लिया था। इस बार, चुनाव आयोग ने राज्य की सभी 126 सीटों पर एक ही चरण में मतदान कराने का फैसला किया है, जो मतदान प्रक्रिया को सरल और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से लिया गया कदम है।
मुख्यमंत्री सरमा का 96-100 सीटें जीतने का दावा
इस बार के चुनाव में मुख्यमंत्री सरमा का 96-100 सीटों का दावा पिछली बार के 75 सीटों के मुकाबले कहीं अधिक महत्वाकांक्षी है। यह भाजपा के भीतर बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है और यह भी बताता है कि पार्टी अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए कितनी उत्सुक है। समान नागरिक संहिता का वादा, अवैध घुसपैठियों से भूमि की वापसी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में बने रहेंगे। इन मुद्दों पर भाजपा का मजबूत रुख मतदाताओं को आकर्षित करने की उम्मीद है, जबकि विपक्षी दल सत्ता विरोधी लहर और स्थानीय मुद्दों को भुनाने की कोशिश करेंगे।
असम का आगामी विधानसभा चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य की दिशा तय करने का चुनाव है। 9 अप्रैल को होने वाला मतदान और 4 मई को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि राज्य में भाजपा की विकास की राजनीति जारी रहेगी या विपक्षी दल कोई नया समीकरण बनाने में सफल होंगे। भाजपा के लिए यह चुनाव अपनी नीतियों और दावों की पुष्टि करने का अवसर है, जबकि कांग्रेस और एआईयूडीएफ जैसे विपक्षी दल अपनी प्रासंगिकता साबित करने की चुनौती का सामना कर रहे हैं। इन सभी राजनीतिक दांव-पेंचों के बीच, असम के मतदाता ही अंतिम निर्णय लेंगे।






