मुंबई में कबूतरखानों को लेकर लंबे समय से जारी विवाद पर अब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने पहल की है। महापालिका ने नागरिकों से राय मांगी है कि कबूतरखानों में नियंत्रित तरीके से और तय समय पर कबूतरों को दाना डालने की अनुमति दी जाए या नहीं। सोमवार (18 अगस्त) से नागरिक अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करा सकते हैं। इस कदम का उद्देश्य है कि लोगों की राय लेकर इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

मुंबई में कबूतरखानों पर विवाद जारी

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले ही सुझाव दिया था कि कबूतरों को नियंत्रित ढंग से भोजन उपलब्ध कराया जाए। इसी संदर्भ में मुंबई हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बीएमसी ने कबूतरों को सुबह 6 से 8 बजे तक ही दाना डालने की सशर्त अनुमति देने की बात कही थी। हालांकि, अदालत ने निर्देश दिए थे कि यह निर्णय एकतरफा नहीं लिया जा सकता, बल्कि इसमें नागरिकों की राय को शामिल करना जरूरी है। इसी कारण अब महापालिका ने जनता से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।

महापालिका को इस विषय पर तीन आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें दादर कबूतरखाना ट्रस्ट, यास्मिन भंसाली एंड कंपनी तथा पशु-पक्षी अधिकार कार्यकर्ता पल्लवी पाटिल के आवेदन शामिल हैं। ये सभी दस्तावेज बीएमसी की वेबसाइट (https://portal.mcgm.gov.in/irj/portal/anonymous?guest_user-english) पर देखे जा सकते हैं। नागरिक इन आवेदनों को देखकर 18 से 29 अगस्त के बीच suggestions@mcgm.gov.in ईमेल आईडी पर अपने सुझाव भेज सकते हैं। जो लोग लिखित में आपत्ति या सुझाव देना चाहें, वे परेल स्थित एफ दक्षिण वॉर्ड कार्यालय में ‘कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी’ को सीधे भी जमा करा सकते हैं।

मुंबई में फिलहाल 51 कबूतरखाने मौजूद हैं। इनमें से दादर का कबूतरखाना सबसे विवादास्पद रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर इसे दूसरी बार तिरपाल से ढककर बंद किया गया है। महापालिका का मानना है कि इस प्रक्रिया से न केवल कबूतरखानों को लेकर विवाद सुलझेगा, बल्कि पक्षियों की सुरक्षा और नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा भी होगी। पारदर्शिता और लोगों की भागीदारी सुनिश्चित कर महापालिका इस मुद्दे पर टिकाऊ समाधान निकालने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।