महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के विलय की अटकलें तेज हो गई हैं। इन चर्चाओं के बीच विपक्षी INDIA गठबंधन ने फिलहाल ‘देखो और इंतजार करो’ की नीति अपना ली है। कांग्रेस समेत गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों ने इसे पवार परिवार का आंतरिक मामला बताते हुए किसी भी तरह की दखलअंदाजी से इनकार किया है।
सूत्रों के मुताबिक, NCP के दोनों गुटों में विलय को लेकर बातचीत अंतिम चरण में थी और इसकी घोषणा 8 फरवरी को ही हो सकती थी। लेकिन, पवार परिवार में हाल ही में एक वरिष्ठ सदस्य के निधन के कारण इस प्रक्रिया को फिलहाल के लिए टाल दिया गया है। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
INDIA गठबंधन ने बनाई दूरी
विलय की खबरों पर INDIA गठबंधन के नेताओं ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली में कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि यह पूरी तरह से पवार परिवार और NCP के दोनों गुटों को तय करना है। उन्होंने कहा, “हम क्या कर सकते हैं? परिवार में शोक का माहौल है, ऐसे में हम कोई पहल नहीं करना चाहते। हम स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जैसे ही चीजें साफ होंगी, उसके अनुसार अगला कदम उठाएंगे।”
इसी तरह की राय गठबंधन के अन्य सहयोगियों ने भी व्यक्त की है। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने कहा कि यह राजनीतिक बातचीत का सही समय नहीं है, क्योंकि परिवार दुख में है। उन्होंने इसे पूरी तरह से NCP का आंतरिक मामला बताया। समाजवादी पार्टी के एक राज्यसभा सांसद ने भी कहा कि जब मामला किसी पार्टी के अंदर का हो तो गठबंधन उसमें दखल नहीं दे सकता।
कांग्रेस में अलग-अलग सुर
हालांकि, इस मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर से ही अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। दिल्ली में AICC के नेता का मानना है कि यदि NCP (SP) गठबंधन से बाहर जाती है, तो यह जरूरी नहीं कि एक बड़ा नुकसान हो। उन्होंने कहा, “राजनीति बहुत गतिशील होती है, कभी-कभी किसी का जाना भी गठबंधन के लिए सकारात्मक हो सकता है।”
इसके विपरीत, महाराष्ट्र से कांग्रेस के एक सांसद ने इसे गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका बताया। उन्होंने कहा, “अगर शरद पवार और उनकी पार्टी गठबंधन छोड़ती है, तो यह बहुत बड़ा नुकसान होगा।” उन्होंने 2019 में महाविकास आघाड़ी (MVA) बनाने में शरद पवार की महत्वपूर्ण भूमिका को याद दिलाया। सांसद ने सुप्रिया सुले को संसद में एक प्रभावशाली वक्ता बताते हुए कहा कि पवार जिस भी गठबंधन में रहते हैं, उसे मजबूती देते हैं।
क्या बदलेंगे संसदीय समीकरण?
इस संभावित विलय का सीधा असर संसद में संख्या बल पर पड़ सकता है। वर्तमान में, शरद पवार गुट (NCP-SP) के पास लोकसभा में 8 और राज्यसभा में 2 सांसद हैं। वहीं, अजित पवार गुट के पास लोकसभा में 1 और राज्यसभा में 3 सांसद हैं।
अगर दोनों गुटों का विलय हो जाता है, तो संयुक्त NCP के पास लोकसभा में 9 और राज्यसभा में 5 सदस्य हो जाएंगे। इससे संसद में NDA की ताकत और बढ़ जाएगी। यही कारण है कि विपक्षी खेमा इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है और इसे अपनी भविष्य की रणनीति के लिए बेहद अहम मान रहा है।





