शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र सामना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया जापान और चीन यात्रा को लेकर तीखा हमला बोला है। संपादकीय में कहा गया कि पीएम मोदी हमेशा की तरह विदेश दौरे पर हैं, पहले जापान और फिर चीन पहुंचे। जापान और चीन में प्रवासी भारतीयों ने उनका जोरदार स्वागत किया और नारेबाजी की, लेकिन पत्र में लिखा गया कि यह स्वागत वास्तविकता से दूर और भ्रामक है। सामना के अनुसार, विदेशों में मोदी की जय-जयकार करने वाले प्रवासी भारतीय भारत की असल स्थिति से अनजान हैं और इन्हें बीजेपी की विदेशी शाखा जुटाती है।

सामना में पीएम मोदी पर साधा निशाना

पत्र में आगे आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतंत्र को रौंदकर सत्ता हासिल की है और चुनाव आयोग के साथ सांठगांठ कर वोट चुराए हैं। राहुल गांधी की ओर से लगाए गए आरोपों का हवाला देते हुए कहा गया कि यह चर्चा विदेशों तक भी पहुंच चुकी है। सामना ने मोदी के यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से हुई फोन वार्ता को भी बेकार करार दिया। लेख में कहा गया कि जब मोदी शांति और संयम की बात कर रहे थे, उसी समय रूस ने यूक्रेन के युद्धपोत पर हमला कर दिया। मोदी द्वारा जेलेंस्की को धैर्य रखने की सलाह देना हास्यास्पद बताया गया।

जापान यात्रा के बाद मोदी के चीन दौरे को लेकर भी सवाल उठाए गए। सामना में लिखा गया कि प्रधानमंत्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में शामिल होने तियानजिन पहुंचे और इस दौरान उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। पत्र ने मोदी और पुतिन की बातचीत पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका के दबाव में भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया, ऐसे में दोनों नेताओं की वार्ता का क्या औचित्य रह जाता है। चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर मोदी के बयानों को लेकर भी सामना ने कहा कि भारत-चीन के तनावपूर्ण रिश्ते इतने आसान नहीं कि सिर्फ बयानों से सुधर जाएंगे।

संपादकीय में अर्थव्यवस्था को लेकर भी केंद्र सरकार पर हमला बोला गया। कहा गया कि डॉलर के मुकाबले रुपया 90 के स्तर पर पहुंच गया है, यही देश की असली आर्थिक हालत है। पत्र में आरोप लगाया गया कि मोदी विदेशी दौरों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं जबकि जनता को स्वदेशी अपनाने की सीख देते हैं। बुलेट ट्रेन का जिक्र करते हुए कहा गया कि जापान में ट्रेन बन रही है और मोदी स्वदेशी का नारा लगा रहे हैं। चीन को लेकर भी पत्र ने सवाल उठाए कि वह लद्दाख और अरुणाचल में घुसपैठ जारी रखे हुए है, पाकिस्तान को ताकत दे रहा है, लेकिन मोदी में इतनी हिम्मत नहीं कि इसे रोकने की बात करें। सामना ने कहा कि मोदी की विदेश नीति अभी भी “रेंग” रही है और पीएम को अब कुछ समय देश में रहकर वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।