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बालासाहेब की जयंती पर एक मंच पर आए राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे, MNS चीफ बोले- ‘शिवसेना नहीं, घर छोड़ा था’

Written by:Ankita Chourdia
Published:
शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी के मौके पर उद्धव और राज ठाकरे मुंबई में एक मंच पर नजर आए. इस दौरान MNS चीफ राज ठाकरे ने कहा कि शिवसेना छोड़ना उनके लिए घर छोड़ने जैसा था और उन्होंने महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति पर भी तीखा तंज कसा.
बालासाहेब की जयंती पर एक मंच पर आए राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे, MNS चीफ बोले- ‘शिवसेना नहीं, घर छोड़ा था’

शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर शुक्रवार को ठाकरे परिवार के दोनों भाई, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे, एक बार फिर एक मंच पर साथ दिखाई दिए. मुंबई के षण्मुखानंद सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने अपने संबोधन में पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि उनके लिए शिवसेना छोड़ना किसी पार्टी को छोड़ने जैसा नहीं, बल्कि घर छोड़ने जैसा था.

राज ठाकरे ने अपने और उद्धव ठाकरे के बीच के पुराने मतभेदों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अब उस बात को 20 साल हो चुके हैं. कुछ बातें उन्हें समझ में आईं और कुछ बातें उद्धव को. यह पहला मौका नहीं है जब दोनों भाई सार्वजनिक मंच पर साथ दिखे हैं, लेकिन इस कार्यक्रम में राज ठाकरे का संबोधन काफी भावनात्मक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

‘बालासाहेब जैसा कलाकार दुनिया में पैदा नहीं हुआ’

राज ठाकरे ने बालासाहेब को एक अद्वितीय कलाकार और राजनेता बताते हुए उनकी जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा, “आज बालासाहेब के बारे में मैं और उद्धव घंटों बात कर सकते हैं. जब वो व्यंग्यचित्र बनाते थे, तो उसमें पूरी तरह तल्लीन हो जाते थे. मैंने वह समाधि जैसी अवस्था देखी है. वह सिर्फ एक कार्टून नहीं होता था, बल्कि ध्यान-साधना जैसा था.”

“बाहर आंदोलन और दंगे चल रहे होते थे लेकिन वे पूरी तरह तल्लीन रहते थे. दुनिया में उनके जैसा कलाकार कोई दूसरा पैदा नहीं हुआ.” — राज ठाकरे

उन्होंने यह भी कहा कि घर में रहते हुए भी वे बालासाहेब जैसे व्यक्तित्व को पूरी तरह कभी समझ नहीं पाए.

महाराष्ट्र की राजनीति पर तीखा हमला

अपने संबोधन में राज ठाकरे ने महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर गहरी चिंता और नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि आज राज्य में ‘गुलामों का बाजार’ लग गया है और ‘इंसानों की नीलामी’ हो रही है.

उन्होंने कहा, “यह अच्छा ही है कि बालासाहेब आज नहीं हैं, क्योंकि अगर वे होते तो यह सब देखकर बहुत दुखी होते. चाहे कल्याण-डोंबिवली हो या दूसरे जिले, हर जगह यही हाल है.” MNS चीफ ने इस बात पर भी जोर दिया कि आज दूसरे दलों में जो कई बड़े नेता दिखाई देते हैं, उन्हें बालासाहेब ठाकरे ने ही बनाया था.

‘कुछ बातें उद्धव ने छोड़ीं, कुछ मैंने’

शिवसेना से अलग होने के अपने फैसले पर बात करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि उस वक्त हालात अलग थे. उन्होंने कहा, “जब मैंने शिवसेना छोड़ी थी, तब कुछ बातें उद्धव ने छोड़ दीं और कुछ बातें मैंने भी छोड़ दीं. मन में कुंठा लेकर बैठे रहने से बेहतर है कि सुबह साफ हो जाए.” इस बयान को दोनों भाइयों के बीच जमी बर्फ पिघलने के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है.