महाराष्ट्र: उद्धव ठाकरे की बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग, ‘ऑपरेशन देवेंद्र’ का किया जिक्र, बोले- यह विद्रोह नहीं, बड़ी राजनीतिक साजिश

महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल, उद्धव ठाकरे ने छह बागी सांसदों को तत्काल अयोग्य घोषित करने की मांग की और भाजपा पर 'ऑपरेशन देवेंद्र' व राम मंदिर के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
uddhav thackeray

महाराष्ट्र की राजनीति में सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए छह पार्टी सांसदों को तत्काल अयोग्य घोषित किए जाने की जोरदार मांग की है। उन्होंने इन सांसदों के पाला बदलने को एक बड़ी सियासी साजिश का हिस्सा बताया, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।

परभणी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने लोकसभा अध्यक्ष से दलबदल कानून का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे व्यवस्थित रूप से अपने ही राज्य के नेताओं के पंख कतर रहे हैं। ठाकरे ने इस दलबदल को एक बड़ी राजनीतिक चाल का हिस्सा करार दिया, जिसे उन्होंने “ऑपरेशन देवेंद्र” नाम दिया। उनका दावा है कि इस ऑपरेशन का मकसद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दरकिनार करना है, ठीक वैसे ही जैसे भाजपा ने अतीत में अन्य नेताओं के साथ किया था। उन्होंने जनसभा में कहा, “लोगों ने यहां (परभणी) मोदी लहर के खिलाफ मतदान किया था। अब, जो सांसद उस लहर के खिलाफ जीतकर आए थे, वे ही पाला बदल गए हैं। यह सिर्फ एक विद्रोह नहीं, बल्कि एक गहरी राजनीतिक साजिश है।”

ठाकरे ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर संभावित प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों को जानबूझकर दरकिनार करने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में केंद्रीय मंत्रियों शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी के साथ-साथ मुख्यमंत्री फडणवीस का उदाहरण दिया। उन्होंने हाल ही में एक हवाई उड़ान के दौरान फडणवीस को “असहाय” दिखने का जिक्र किया और आरोप लगाया कि “उनके अपने बॉस ही उनके पंख कतर रहे थे।”

राम मंदिर दान मुद्दे पर उद्धव ठाकरे का भाजपा पर हमला

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे ने राम मंदिर दान में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने भाजपा को “बाबर जनता पार्टी” तक कह डाला। ठाकरे ने आरोप लगाया कि भगवा पार्टी राम मंदिर का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है। उन्होंने कहा, “बाबर ने राम मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। अब एक ‘बाबर जनता पार्टी’ नव-निर्मित मंदिर को लूटने आई है। उनमें क्या अंतर है?” ठाकरे ने अपनी बात जारी रखते हुए आरोप लगाया, “राम मंदिर हिंदुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मेरा सवाल यह है कि उन्होंने इस मंदिर को दुकान क्यों बना दिया? यह मंदिर एक लंबे संघर्ष का परिणाम है। पहले भाजपा ने ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’ का नारा दिया था। अब, हम जानते हैं कि वे इस मंदिर का निर्माण क्यों चाहते थे। उन्होंने हिंदुत्व की विचारधारा से पूरी तरह विश्वासघात किया है।”

बागी सांसदों को अयोध्य घोषित करने की मांग

बागी सांसदों को लेकर अपनी आगे की योजना बताते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, “अगर इस देश में कानून का शासन है, तो इन छह सांसदों को तत्काल अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। मुझे अभी भी लोकसभा अध्यक्ष पर पूरा विश्वास है, क्योंकि अगर वह कानून का पालन नहीं करेंगे, तो वह दूसरों से इसका पालन करने के लिए नहीं कह सकते। हम उनके अधिकार का सम्मान करते हैं, उनकी इच्छाओं का नहीं।” हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों ने उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल होने की घोषणा की थी। इन सांसदों ने 2024 के आम चुनावों में भाजपा और शिवसेना के उम्मीदवारों के खिलाफ जीत हासिल की थी। 2024 में शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र में कुल नौ लोकसभा सीटें जीती थीं।

उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे पर साधा निशाना

एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए ठाकरे ने दावा किया कि उपमुख्यमंत्री का भाजपा-नीत गठबंधन में कोई भविष्य नहीं है और उनका इस्तेमाल करने के बाद उन्हें फेंक दिया जाएगा। उन्होंने बागी सांसदों की संपत्ति के स्रोत पर भी सवाल उठाए, निजी जेट में उनकी यात्राओं का जिक्र किया और किसानों की दुर्दशा की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने खासतौर से पिछले साल की फसल क्षति के बाद परभणी की अपनी यात्रा को याद किया और आरोप लगाया कि बागी सांसद संजय जाधव उस समय अनुपस्थित थे।

ठाकरे ने इस दावे का जोरदार खंडन किया कि उनका गुट बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से भटक गया है। उन्होंने अपनी पार्टी द्वारा महाराष्ट्र में भाजपा की दो सीटों की तुलना में चार लोकसभा सीटें जीतने का हवाला दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने 1987 के विले पार्ले उपचुनाव के बाद ही हिंदुत्व को अपनाया था, इससे पहले वह गांधीवादी समाजवाद का पालन करती थी और बाबरी मस्जिद विध्वंस से खुद को दूर रखती थी।

Ankita Chourdia
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