शिवसेना प्रमुख उद्धव बालासाहेब ठाकरे की पारंपरिक दशहरा रैली इस साल भी मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित होगी। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने 2 अक्टूबर को होने वाली इस रैली के लिए अनुमति दे दी है। दशकों से चली आ रही इस परंपरा के चलते हर साल शिवाजी पार्क में यह रैली होती है, लेकिन इस बार बीएमसी ने अनुमति के साथ 25 शर्तें भी जोड़ी हैं। इनमें से कई सामान्य शर्तें हैं, लेकिन 16वीं शर्त को लेकर ठाकरे गुट की चिंता बढ़ गई है। इस अनुमति के बाद अब शिवसेना (ठाकरे गुट) ने रैली की तैयारियां शुरू करने का निर्णय लिया है।
बीएमसी द्वारा लगाई गई शर्तों के अनुसार, मैदान के उपयोग के लिए आयोजकों को प्रतिदिन 250 रुपये और उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। साथ ही आयोजकों को बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा समय-समय पर दिए गए आदेशों और राज्य सरकार के फैसलों का पालन करना अनिवार्य होगा। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियम 2000 के तहत ध्वनि की सीमा से अधिक शोर न हो, इसके लिए विशेष सावधानी बरतनी होगी। रैली के लिए संबंधित पुलिस थाने से पूर्व अनुमति आवश्यक होगी और यदि लाउडस्पीकर का उपयोग करना है तो अलग से मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी और संरचनात्मक इंजीनियर से अनापत्ति प्रमाण पत्र तथा स्थिरता प्रमाणपत्र लेना भी जरूरी होगा।
उद्धव ठाकरे की दशहरा रैली को मिली मंजूरी
अनुमति की अन्य शर्तों में यह स्पष्ट किया गया है कि आयोजन स्थल को कार्यक्रम के बाद उसकी मूल स्थिति में बहाल करना होगा। मैदान में वाहनों की आवाजाही पर सख्त प्रतिबंध रहेगा और कार्यक्रम के लिए बनाए गए पंडाल व मंच को रैली समाप्त होते ही हटा दिया जाना चाहिए। आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार का भोजन पकाने की अनुमति नहीं होगी और रात 10 बजे के बाद कार्यक्रम जारी नहीं रह सकेगा। आयोजकों को 20,000 रुपये की जमा राशि भी देनी होगी, जिसे नियमों के उल्लंघन, मैदान को क्षति पहुंचने या दुरुपयोग की स्थिति में जब्त किया जा सकता है। इतना ही नहीं, यदि शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है तो आयोजकों को अगले वर्ष मैदान का उपयोग करने की अनुमति भी नहीं मिलेगी।
बीएमसी की शर्तों में यह भी कहा गया है कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) के दिशानिर्देशों के तहत मैदान में मिट्टी डालने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े किसी भी शुल्क का भुगतान आयोजकों को स्वयं करना होगा। कोर्ट और सरकार द्वारा समय-समय पर दिए गए अन्य आदेश भी लागू रहेंगे और यदि भविष्य में कोई अतिरिक्त शर्त तय की जाती है तो आयोजकों को उसका पालन करना होगा। इन सख्त नियमों और शर्तों के बीच शिवसेना (ठाकरे गुट) की यह दशहरा रैली राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि हर साल इस मंच से उद्धव ठाकरे अपनी रणनीति और संदेश जनता तक पहुंचाते हैं।





