मध्य प्रदेश के उमरिया जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां विकटगंज स्थित परफेक्ट पब्लिक स्कूल पर गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि स्कूल प्रबंधन ने करीब 112 छात्र-छात्राओं को परीक्षा देने से वंचित कर दिया। अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने स्कूल की फीस भी जमा कर दी थी, इसके बावजूद बच्चों को परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। वहीं शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच और कार्रवाई की बात कही है।
उमरिया जिले के विकटगंज में स्थित परफेक्ट पब्लिक स्कूल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने करीब 112 छात्र-छात्राओं को वार्षिक परीक्षा से वंचित कर दिया। परीक्षा से रोके जाने के बाद छात्रों और उनके अभिभावकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
112 छात्र छात्राओं को परीक्षा से किया वंचित
अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने समय पर स्कूल की फीस जमा कर दी थी, इसके बावजूद बच्चों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई। अचानक लिए गए इस फैसले से छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है। वहीं परफेक्ट पब्लिक स्कूल की संचालक सत्येंद्र यादव ने भी माना है कि लगभग 112 छात्र-छात्राओं को परीक्षा से वंचित किया गया है
डीपीसी ने दिए जाँच के आदेश
उधर इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग ने भी संज्ञान लिया है। डीपीसी केके डहेलिया का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि स्कूल प्रबंधन ने नियमों के विरुद्ध छात्रों को परीक्षा से रोका है, तो संबंधित संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस मामले ने शिक्षा व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि आखिर किस आधार पर इतनी बड़ी संख्या में छात्रों को परीक्षा देने से रोका गया और स्कूल प्रबंधन ने ऐसा निर्णय क्यों लिया। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या छात्रों को न्याय मिल पाता है या नहीं। फिलहाल उमरिया से यह मामला शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।






