उद्धव ठाकरे गुट को छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने वाले शिवसेना यूबीटी के 6 बागी संसद कानूनी मुश्किल में फंस गए हैं। बगावत करने वाले सांसदों पर उद्धव ने कानूनी वार करते हुए, उनके विलय के दावों को गैरकानूनी बताया है।
शिवसेना यूबीटी ने बागी विधायकों को कानूनी नोटिस भेजा है। उनका कहना है कि बागी विधायकों का शिंदे गुट के साथ विलय संभव नहीं है। वहीं मुख्यमंत्री शिंदे ने विपक्ष के इस कदम को बेअसर करार दिया है।
सांसदों को शिवसेना यूबीटी का पत्र
शिवसेना यूबीटी दल के नेता अरविंद सावंत ने 13 जुलाई को सभी 6 सांसदों को पत्र लिखे हैं। इसमें उन्होंने सांसदों को ये याद दिलाया है कि 2024 का लोकसभा चुनाव उन्होंने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में पार्टी के चुनाव चिन्ह से शिंदे गुट के खिलाफ लड़ा था और जीत हासिल की थी।
The independent legislative groups hold no legal standing without the original party’s consent. There is no provision in the constitution of India that the groups can be given a recognition. Anti-defection law itself doesn’t recognize such groups. Therefore we have served the… pic.twitter.com/MldHT7vUQz
— Arvind Sawant (@AGSawant) July 14, 2026
विलय को बताया गैर कानूनी
यूबीटी नेता अरविंद सावंत का कहना है कि मूल राजनीतिक दल में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ किसी भी तरह के विलय की शुरुआत नहीं की है। संविधान की दसवीं अनुसूची के दल बदल विरोधी कानून के पैराग्राफ 4 का भी उन्होंने हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि जब मूल राजनीतिक दल का विलय नहीं हुआ है तो सदन के भीतर विधायी दल के विलय सवाल ही नहीं उठता। कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी अध्यक्ष को पहले भी सूचित कर चुकी है कि सांसदों के किसी भी विलय या अलग समूह को मान्यता न दी जाए और अब तक ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।
शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) हा मूळ पक्ष कुठल्याही पक्षात विलीन झालेला नाही आणि होऊ शकत नाही. कायद्यानुसार मूळ पक्षाच्या संमतीशिवाय लोकप्रतिनिधींना स्वतःहून विलीनीकरणाचा कोणताही अधिकार नाही. कथित ‘विलीनीकरणाचा’ दावा घटनात्मक दृष्ट्या पूर्णपणे बेकायदेशीर आहे. पक्षाची अधिकृत… pic.twitter.com/8vhRnD6U0J
— Arvind Sawant (@AGSawant) July 14, 2026
बागी सांसदों का क्या कहना
जिन बागी सांसदों को नोटिस दिया गया है। उनमें से अधिकतर में टिप्पणी देने से मना कर दिया है और कहा है कि उप मुख्यमंत्री शिंदे उनकी तरफ से जवाब दे चुके हैं। अब इन सांसदों का विलय किस तरह से संभव होगा ये आने वाले समय में पता चलेगा।






