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मंदसौर में नकली दूध का बड़ा खेल बेनकाब! 3 साल से चल रही फैक्ट्री पर छापा

Written by:Bhawna Choubey
Published:
मंदसौर में नकली दूध फैक्ट्री पकड़े जाने से हड़कंप मच गया है। तीन साल से चल रहे इस गोरखधंधे में केमिकल से दूध बनाया जा रहा था। सवाल यह है कि आखिर इतना बड़ा खेल इतने समय तक कैसे चलता रहा?
मंदसौर में नकली दूध का बड़ा खेल बेनकाब! 3 साल से चल रही फैक्ट्री पर छापा

मध्य प्रदेश के मंदसौर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने हर घर में इस्तेमाल होने वाले दूध को लेकर लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है। यहां पुलिस ने एक नकली दूध फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है, जहां केमिकल मिलाकर सिंथेटिक दूध तैयार किया जा रहा था। यह सिर्फ मिलावट नहीं, बल्कि लोगों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है।

यह मामला सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। तीन साल तक लगातार यह अवैध कारोबार चलता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी। अब जब यह खुलासा हुआ है, तो हर कोई यही सोच रहा है कि आखिर वह दूध कितना सुरक्षित है जो हम रोज पीते हैं।

कहां और कैसे पकड़ी गई नकली दूध फैक्ट्री

मंदसौर जिले के कोटड़ा बुजुर्ग गांव में यह नकली दूध फैक्ट्री संचालित हो रही थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि यहां लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। इसके बाद शामगढ़ थाना पुलिस ने टीम बनाकर मौके पर दबिश दी।

जैसे ही पुलिस अंदर पहुंची, वहां का नजारा देखकर सब हैरान रह गए। बड़े-बड़े ड्रमों में केमिकल भरा हुआ था और पास ही दूध जैसा दिखने वाला तरल पदार्थ तैयार किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि यही केमिकल मिलाकर सिंथेटिक दूध बनाया जा रहा था।

इस मंदसौर नकली दूध फैक्ट्री में करीब 1000 लीटर केमिकल और 1500 लीटर नकली दूध जब्त किया गया है। इसके अलावा कई उपकरण भी मिले हैं, जिनसे यह अवैध काम किया जा रहा था।

तीन साल से चल रहा था यह गोरखधंधा

इस पूरे मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह नकली दूध फैक्ट्री पिछले तीन साल से लगातार चल रही थी। इतने लंबे समय तक बिना किसी रुकावट के यह कारोबार होना कई सवाल खड़े करता है।

इस नकली दूध का इस्तेमाल आसपास के इलाकों में सप्लाई के लिए किया जाता था। यानी यह दूध सीधे लोगों के घरों तक पहुंच रहा था। सोचने वाली बात यह है कि कितने लोग इस जहरीले दूध का सेवन कर चुके होंगे।

इस तरह के मामलों में अक्सर यह सामने आता है कि आरोपी लोग बहुत चालाकी से काम करते हैं। वे ऐसे इलाकों को चुनते हैं जहां निगरानी कम होती है और आसानी से अपना काम चला सकें।

केमिकल से कैसे बनता है सिंथेटिक दूध

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस नकली दूध फैक्ट्री में अलग-अलग केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन केमिकल्स को मिलाकर दूध जैसा रंग और गाढ़ापन तैयार किया जाता था।

हम समझते हैं कि यह सिंथेटिक दूध दिखने में असली जैसा लगता है, लेकिन यह सेहत के लिए बेहद खतरनाक होता है। इसमें मौजूद केमिकल्स शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा सकते हैं और लंबे समय तक सेवन करने पर गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। यही कारण है कि पुलिस ने मौके से सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए लैब भेजा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें कौन-कौन से केमिकल इस्तेमाल किए गए हैं।

लोगों की सेहत पर कितना बड़ा खतरा

मंदसौर नकली दूध मामले ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि खाने-पीने की चीजों में मिलावट कितना बड़ा खतरा बन चुकी है। दूध, जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी के लिए जरूरी होता है, अगर वही मिलावटी हो जाए तो इसका असर सीधे सेहत पर पड़ता है।

इस तरह के नकली दूध से पेट की बीमारियां, कमजोरी, एलर्जी और यहां तक कि गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह और भी खतरनाक होता है। इस घटना के बाद लोगों में डर का माहौल है और हर कोई अब दूध खरीदते समय ज्यादा सतर्क हो गया है।

पुलिस कार्रवाई और आगे की जांच

पुलिस ने इस नकली दूध फैक्ट्री पर कार्रवाई करते हुए मौके से सभी सामग्री जब्त कर ली है। साथ ही आरोपियों की तलाश भी शुरू कर दी गई है। पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि यह दूध कहां-कहां सप्लाई किया जा रहा था।

 

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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