मंदसौर के जवाहरलाल नेहरू लॉ कॉलेज में फीस को लेकर छात्रों और कॉलेज प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ गया है। 13 हजार रुपए से बढ़कर 25 हजार रुपए फीस होने से नाराज छात्र सोमवार सुबह कॉलेज गेट के बाहर धरने पर बैठ गए।
दिनभर प्रदर्शन के बाद भी जब कोई ठोस फैसला नहीं हुआ तो कई छात्र रातभर वहीं डटे रहे। देर रात करीब 2 बजे तक कॉलेज के बाहर नारेबाजी चलती रही। कुछ छात्र गेट के बाहर ही सो गए। मंगलवार सुबह तक भी छात्रों का प्रदर्शन जारी था।
मंदसौर लॉ कॉलेज में फीस को लेकर रातभर चला प्रदर्शन
फीस के विरोध में छात्रों ने सोमवार सुबह जवाहरलाल नेहरू लॉ कॉलेज के गेट पर धरना शुरू किया था। छात्रों की मांग थी कि मौजूदा विद्यार्थियों से पहले वाली फीस ही ली जाए और 25 हजार रुपए की फीस का फैसला वापस लिया जाए।
दोपहर तक जब छात्रों से बातचीत करने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा तो नाराज विद्यार्थी सड़क पर बैठ गए। इससे कुछ समय के लिए चक्काजाम जैसी स्थिति बन गई। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन और शासन के खिलाफ नारे लगाए।
13 हजार से 25 हजार हुई फीस
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का सबसे बड़ा सवाल फीस में हुए बदलाव को लेकर है। छात्रों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2024-25 में प्रवेश के समय करीब 13 हजार रुपए फीस निर्धारित थी। अब 2026-27 के सत्र में यही फीस 25 हजार रुपए बताई जा रही है।
छात्रों का कहना है कि करीब 12 हजार रुपए का अंतर उनके लिए मामूली नहीं है। खासकर ऐसे विद्यार्थी जो मध्यमवर्गीय या किसान परिवारों से आते हैं, उनके लिए एक साथ फीस का बोझ बढ़ना परेशानी का कारण बन सकता है।
छात्रों ने 17 अगस्त को कलेक्टर को भी दिया था आवेदन
फीस का मामला सोमवार के प्रदर्शन से पहले भी प्रशासन के सामने उठाया जा चुका है। छात्रों ने 17 अगस्त को कलेक्टर के समक्ष आवेदन देकर फीस कम करने की मांग की थी।
आवेदन में छात्रों की मांग थी कि बढ़ी हुई फीस नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर लागू की जाए। जो विद्यार्थी पहले से कॉलेज में पढ़ रहे हैं, उनकी फीस पुरानी दर पर ही रखी जाए।
प्राचार्य बोले- फीस बढ़ाई नहीं, पुरानी फीस रिस्टोर की गई
फीस विवाद पर जवाहरलाल नेहरू लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विनोद पाटीदार ने छात्रों के आरोपों से अलग तस्वीर सामने रखी है। प्राचार्य के अनुसार, कॉलेज ने अचानक फीस नहीं बढ़ाई है। उनका कहना है कि वर्ष 2019-20 में फीस 25 हजार रुपए निर्धारित की गई थी। बाद में फीस रेगुलेटरी कमेटी यानी FRC के स्तर पर फीस कम कर दी गई थी।
अब उसी पुरानी निर्धारित फीस को दोबारा लागू किया गया है। इसलिए कॉलेज प्रबंधन इसे फीस बढ़ाना नहीं, बल्कि पहले से निर्धारित फीस को रिस्टोर करना बता रहा है। यहीं से छात्रों और कॉलेज प्रबंधन के बीच विवाद की मुख्य वजह सामने आती है। छात्र वर्तमान में करीब 13 हजार रुपए फीस दे रहे थे और अब उनसे 25 हजार रुपए मांगे जा रहे हैं।
FRC ने फीस दो किस्तों में जमा करने का फैसला लिया
प्राचार्य डॉ. विनोद पाटीदार के मुताबिक छात्रों के पहले प्रदर्शन के बाद फीस के मुद्दे पर FRC की बैठक हुई थी। प्रदेश के कॉलेजों की फीस तय करने में फीस रेगुलेटरी कमेटी की भूमिका होती है। बैठक में छात्रों को राहत देने के लिए फीस दो किस्तों में जमा कराने का फैसला लिया गया। इससे विद्यार्थियों को पूरी राशि एक साथ जमा करने की परेशानी नहीं होगी।
हालांकि, छात्रों की मुख्य मांग फीस को किस्तों में जमा करने की नहीं है। विद्यार्थी फीस की कुल राशि कम करने की मांग कर रहे हैं। यही कारण है कि दो किस्तों में फीस जमा करने के फैसले के बावजूद उनका विरोध खत्म नहीं हुआ।
छात्रों और कॉलेज प्रबंधन के दावों में क्या अंतर है?
मंदसौर लॉ कॉलेज फीस विवाद में दोनों पक्षों की अपनी-अपनी दलील है। छात्र इसे फीस बढ़ोतरी मान रहे हैं, क्योंकि उनके लिए फीस 13 हजार रुपए से बढ़कर 25 हजार रुपए हो गई है।
दूसरी तरफ कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि 25 हजार रुपए नई फीस नहीं है। कॉलेज के अनुसार यह वही राशि है जो वर्ष 2019-20 में निर्धारित की गई थी और बाद में FRC के फैसले के कारण फीस कम हुई थी।






