मंदसौर के गांधी चौराहे पर पिछले 19 सितंबर से चल रहा सफाई कर्मचारियों का प्रदर्शन गुरुवार देर रात को रुक गया। नगर पालिका अध्यक्ष और अधिकारियों के साथ हुई लंबी बातचीत के बाद कर्मचारी वापस अपने काम पर लौट आए हैं। समझौते के तुरंत बाद रात को करीब 11 बजे कर्मचारी झाड़ू और कचरा उठाने वाली गाड़ियां लेकर शहर की सड़कों पर सफाई करने उतर गए।

स्थानीय स्तर की 11 मांगों पर बनी बात

नगर पालिका और कर्मचारियों के बीच हुई बैठक में 11 स्थानीय मांगों पर सहमति बन गई है। इसके तहत रोज की मजदूरी पर काम करने वाले और संविदा कर्मचारियों की एक साफ लिस्ट बनाई जाएगी। इसके अलावा छुट्टी के दिन काम करने पर अलग से पैसा देने, ईपीएफ की दिक्कतों को दूर करने और काम से हटाए गए कर्मचारियों को वापस नौकरी पर लेने जैसी बातों पर अधिकारियों ने तुरंत हां कह दिया है।

बाकी मांगों के प्रस्ताव शासन को भेजेगी नगर पालिका

दरअसल, कर्मचारियों की कुछ मांगें ऐसी हैं जिन पर फैसला नगर पालिका अकेले नहीं ले सकती। जैसे कि सभी को एक जैसा वेतन देना, नौकरी पक्की करना, ठेका प्रथा खत्म करना और 100 नए सफाई कर्मचारियों की भर्ती करना। इन सभी मांगों के लिए नगर पालिका की मीटिंग में प्रस्ताव पास किया जाएगा। अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि 8 से 10 दिनों में यह प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया जाएगा।

19 सितंबर से चल रहा था आंदोलन

अपनी 15 अलग-अलग मांगों को लेकर कर्मचारी 19 सितंबर से गांधी चौराहे पर धरने पर बैठे थे। पहले उन्होंने 26 सितंबर से भूख हड़ताल शुरू की और फिर बात न बनने पर 5 अक्टूबर से काम पूरी तरह बंद कर दिया। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में 15-20 साल से काम कर रहे लोगों की नौकरी पक्की करना और किसी कर्मचारी की मौत होने पर एक महीने के अंदर परिवार के सदस्य को नौकरी देना शामिल है।

20 दिन में काम नहीं हुआ तो फिर शुरू होगा आंदोलन

कर्मचारी संगठन के नेता सतीश खेरालिया ने बताया कि स्थानीय मांगों का हल 15 से 20 दिनों में निकालने का वादा मिला है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर तय समय के अंदर नगर पालिका ने अपने वादे पूरे नहीं किए, तो सभी सफाई कर्मचारी एक बार फिर काम बंद करके सड़कों पर उतरेंगे। फिलहाल शहर में सफाई का काम फिर से शुरू होने से आम लोगों ने बड़ी राहत की सांस ली है।