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मुरैना के स्कूल में जर्जर छत का खतरा, बारिश में टपकती छत के नीचे पढ़ रहे 50 बच्चे

मुरैना के चक्कपुरा प्राथमिक स्कूल की जर्जर इमारत और टपकती छत की वजह से 50 मासूम बच्चे भीगकर पढ़ने को मजबूर हैं। मेंटेनेंस बजट में गड़बड़ी के आरोपों पर डीपीसी ने जांच का आश्वासन दिया है।
मुरैना: टपकती छत और सीलन भरे कमरों में पढ़ने को मजबूर 50 मासूम, 12 साल से एक ही हेडमास्टर फिर भी स्कूल बदहाल

मुरैना के रामपुर इलाके में बने चक्कपुरा प्राथमिक स्कूल की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि यहाँ पढ़ने वाले 50 मासूमों का भविष्य दांव पर लगा है। बारिश शुरू होते ही छतों से पानी टपकने लगता है, जिससे बचने के लिए बच्चों को कभी गीले फर्श पर भीगते हुए पढ़ना पड़ता है, तो कभी बाहर खुले मैदान में बोरियां बिछाकर बैठना पड़ता है।

हर वक्त सताता है हादसे का डर

कमरों में फैली सीलन और कभी भी गिर सकने वाले प्लास्टर की वजह से बच्चों के माता-पिता की सांसें अटकी रहती हैं। जब भी आसमान में बादल घिरते हैं, अभिभावकों को किसी अनहोनी का डर सताने लगता है। परेशान ग्रामीणों ने अब शिक्षा विभाग के अफसरों से साफ कहा है कि वे खुद आकर इस जर्जर इमारत का मुआयना करें और तुरंत छत की मरम्मत करवाएं।

मुरैना: टपकती छत और सीलन भरे कमरों में पढ़ने को मजबूर 50 मासूम, 12 साल से एक ही हेडमास्टर फिर भी स्कूल बदहाल

12 साल से एक ही हेडमास्टर

गांव के लोगों का गुस्सा इस बात पर भी फूट रहा है कि स्कूल में पिछले 12 सालों से एक ही प्रधान अध्यापक, जगन्नाथ सिंह, तैनात हैं। गांव के रहने वाले रामावतार का कहना है कि एक दशक से ज्यादा के इस लंबे वक्त में तो पूरे स्कूल की सूरत बदली जा सकती थी। लेकिन इतने साल बीत जाने के बाद भी नौनिहाल पानी से भरे कमरों में बैठने को मजबूर हैं।

सरकारी बजट की लीपापोती पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने स्कूल के मेंटेनेंस में मिलने वाली सरकारी राशि में बड़े झोल का अंदेशा जताया है। नियमों के मुताबिक हर साल स्कूल के रखरखाव के लिए बाकायदा फंड जारी होता है और चक्कपुरा स्कूल को भी यह बजट मिला है। इसके बावजूद इमारत की बदहाली दूर क्यों नहीं हुई? गांव वालों ने मांग की है कि पिछले सालों में आए मेंटेनेंस बजट और उससे कराए गए कागजी कामों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

अधिकारी बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद मुरैना डीपीसी हरीश तिवारी ने कहा कि जब शासन की तरफ से रखरखाव का नियमित बजट दिया जा रहा है, तो फिर मरम्मत न होना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने भरोसा दिया है कि वे खुद मौके पर जाकर स्कूल भवन का जायजा लेंगे और इतने सालों से जमे हेडमास्टर से भी इस लापरवाही को लेकर सीधा जवाब मांगेंगे।

Nitendra Sharma
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मुरैना के स्कूल में जर्जर छत का खतरा, बारिश में टपकती छत के नीचे पढ़ रहे 50 बच्चे