प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज बुधवार (25 मार्च 2026) को अहम कैबिनेट बैठक बुलाई गई। इस बैठम में एक दर्जन से ज्यादा प्रस्तावों पर मुहर लगने की संभावना है। चर्चा है कि बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत में 2 फीसदी की वृद्धि का भी फैसला लिया जा सकता है। अगर मंजूरी मिलती है तो महंगाई भत्ता 58% से बढ़कर 60% हो जाएगा। इसका लाभ करीब 49 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 68 लाख पेंशनर्स को मिलने की उम्मीद है।

दरअसल, वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 58% महंगाई भत्ते व महंगाई राहत (जो जुलाई 2025 से प्रभावी है) का लाभ मिल रहा है। श्रम ब्यूरो (Labour Bureau) द्वारा जारी ​अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के आधार पर जनवरी 2026 से महंगाई भत्ते में 2% की बढ़ोतरी होना निश्चित माना जा रहा है। चुंकी दिसंबर 2025 में सूचकांक 148.2 अंक पर स्थिर रहा था, जिसके आधार पर गणना करने पर महंगाई भत्ते का स्कोर 60.33% बैठता है, लेकिन महंगाई भत्ते की गणना दशमलव के बाद के अंक को छोड़कर की जाती है ऐसे में कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता 58% से बढ़कर 60% होने की उम्मीद है।

1 जनवरी 2026 से लागू होंगी नई दरें, एरियर मिलेगा

कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद वित्त मंत्रालय द्वारा आदेश जारी किए जाएंगे। चुंकी नई दरें जनवरी 2026 से प्रभावी होंगी जो जून 2026 तक लागू रहेंगी। जनवरी व फरवरी का एरियर मार्च या अप्रैल के वेतन के साथ मिलने की संभावना है। यह डीए बढ़ोतरी 31 दिसंबर 2025 को 7वें वेतन आयोग के औपचारिक समापन के बाद पहली समीक्षा होगी। महंगाई भत्ते में 2% की बढ़ोतरी से अलग-अलग वेतन स्तर के कर्मचारियों की सैलरी में सीधा इजाफा देखने को मिलेगा।

जानिए किसकी कितनी बढ़ेगी सैलरी?

  • यदि कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है, उन्हें वर्तमान में 10,440 रुपये (58% की दर से) DA मिल रहा है। 60% होने पर यह बढ़कर 10,800 रुपये हो जाएगा, यानी हर महीने 360 रुपये की वृद्धि होगी।
  • 40,000 बेसिक सैलरी वालों के वेतन में हर माह 800 रुपए का इजाफा होगा और 63,200 की जगह 64,000 रुपए मिलेंगे। बेसिक सैलरी 50,000 है तो 79,000 की जगह 80,000 रुपए मिलने की उम्मीद है।
  • 60,000 बेसिक सैलरी वालों को 94,800 की जगह 96,000, 80,000 वालों को 1,26,400 की जगह 1,28,000 और 1,00,000 लाख सैलरी वालों को 1,58,000 की जगह 1,60,000 मिल सकते हैं।

कैसे होती है महंगाई भत्ते की गणना?

महंगाई भत्ता एक भुगतान है जो केन्द्र और राज्य सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मुद्रास्फीति के प्रभाव को संतुलित करने के लिए देती हैं। यह वेतन का एक अतिरिक्त हिस्सा होता है, जिसे समय-समय पर महंगाई दर के आधार पर संशोधित किया जाता है। इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुसार तय करती है।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते की गणना करने का एक फॉर्मूला है। फॉर्मूला है: 7वां सीपीसी डीए% = [{पिछले 12 महीनों के लिए एआईसीपीआई-आईडब्ल्यू (आधार वर्ष 2001=100) का 12 महीने का औसत – 261.42}/261.42×100]