नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोमवार को संसद में दिल्ली का चुनाव रद्द करने की मांग उठाकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने संसद के शून्य काल के दौरान चर्चा के लिए एक नोटिस दिया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि दिल्ली की चुनी हुई सरकार को बदनाम करने और चुनाव हराने के लिए एक गहरी साजिश रची गई।
संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी देते हुए अपने नोटिस की प्रति भी साझा की। उन्होंने जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली में फिर से लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराए जाने चाहिए।
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‘झूठा मुकदमा लगाकर चुनाव हराया’
संजय सिंह ने अपने नोटिस में दिल्ली आबकारी नीति मामले का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत पार्टी के कई नेताओं को अवैध तरीके से गिरफ्तार किया गया। उन्होंने दावा किया कि यह सब एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था ताकि आम आदमी पार्टी को चुनाव में हराया जा सके।
“दिल्ली का चुनाव रद्द हो। लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार को झूठा मुकदमा लगाकर बदनाम किया गया। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित आप के तमाम नेताओं को अवैध तरीके से गिरफ्तार किया गया और साजिश रचकर चुनाव हराया गया है।”- संजय सिंह, राज्यसभा सांसद
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब जांच एजेंसियां अदालत में विश्वसनीय सबूत पेश करने में विफल रहती हैं, तो यह संदेह पैदा होता है कि गिरफ्तारियों का मकसद न्याय नहीं, बल्कि राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाना था।
अदालत की टिप्पणी का दिया हवाला
सदन को दिए गए नोटिस में संजय सिंह ने निचली अदालत की टिप्पणियों को अपनी मांग का आधार बनाया है। उन्होंने लिखा, “विशेष अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अभियोजन पक्ष ‘प्रथम दृष्टया’ साक्ष्य स्थापित करने में विफल रहा और मामले को कानूनी रूप से अस्थिर बताया। न्यायपालिका की यह टिप्पणी जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है।”
इसी आधार पर उन्होंने सरकार से दिल्ली में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है, ताकि जनादेश की निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
मामले में हाईकोर्ट का नया मोड़
यह मामला उस वक्त और जटिल हो गया जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के एक फैसले पर रोक लगा दी। दरअसल, 27 फरवरी को एक निचली अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता समेत 23 आरोपियों को इस मामले में आरोप मुक्त कर दिया था। अदालत ने सीबीआई के मामले को ‘पूरी तरह से निराधार’ बताते हुए फटकार भी लगाई थी।
हालांकि, सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने निचली अदालत द्वारा सीबीआई पर की गई प्रतिकूल टिप्पणियों पर रोक लगा दी। इसके साथ ही, उच्च न्यायालय ने सभी 23 आरोपियों को नोटिस भी जारी किया है, जिससे यह मामला एक नए कानूनी मोड़ पर आ गया है।