छत्रपति संभाजीनगर में मांस की दुकानों पर स्वतंत्रता दिवस और गोकुल अष्टमी के अवसर पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में AIMIM नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने अपने निवास पर बिरयानी पार्टी का आयोजन किया। उन्होंने इस प्रतिबंध को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आलोचना की और पूछा कि उन्होंने इस आदेश को वापस लेने के लिए नगर निगम आयुक्त को निर्देश क्यों नहीं दिया। जलील ने कहा कि सरकार को यह तय नहीं करना चाहिए कि लोग क्या खाएं और क्या नहीं।
छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम ने मंगलवार को घोषणा की थी कि स्वतंत्रता दिवस और जैन समुदाय के प्रमुख पर्व पर्युषण (20 अगस्त) के अवसर पर शहर में कत्लखाने और मांस की दुकानें बंद रहेंगी। जलील ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि उन्होंने अपने घर पर चिकन बिरयानी के साथ-साथ शाकाहारी भोजन भी तैयार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर नगर निगम आयुक्त शाकाहारी भोजन मांगें तो वह उन्हें उपलब्ध कराएंगे।
फडणवीस पर साधा निशाना
इम्तियाज जलील ने इस मुद्दे पर फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री ने आयुक्त को आदेश वापस लेने का निर्देश दिया होता तो यह विवाद खत्म हो गया होता। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ऐसी नीतियों से क्या हासिल करना चाहती है, जब वह मांस खाने की अनुमति देती है लेकिन बाजार में इसे उपलब्ध नहीं होने देती। जलील ने यह भी पूछा कि क्या गोकुल अष्टमी केवल कुछ जिलों में मनाई जा रही है क्योंकि पूरे राज्य में हिंदू इसे मना रहे हैं, फिर भी सभी जगह यह प्रतिबंध लागू नहीं है।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा विवाद
इसके अलावा नागपुर, नासिक और मालेगांव के नगर निगमों ने भी इसी तरह के आदेश जारी किए, जिससे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी दलों ने इस कदम की आलोचना की है जबकि बीजेपी ने तर्क दिया कि स्वतंत्रता दिवस पर कत्लखाने बंद करने की नीति सबसे पहले 1988 में एनसीपी (एसपी) अध्यक्ष शरद पवार के मुख्यमंत्री रहते लागू हुई थी। इस बीच, फडणवीस ने कहा कि सरकार लोगों के खान-पान को नियंत्रित करने में रुचि नहीं रखती और इस विवाद को अनावश्यक बताया।






