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‘कोई भी देश एयर क्वालिटी रैंकिंग मानने के लिए बाध्य नहीं’ – सरकार, जानिए क्यों उठ रहे एयर क्वालिटी को लेकर सवाल?

Written by:Rishabh Namdev
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भारत सरकार की ओर से संसद में एयर क्वालिटी की रैंकिंग को लेकर बड़ा बयान दिया गया है। दरअसल सरकार का कहना है कि किसी भी विश्व संगठन द्वारा कोई ऑफिशियल रैंकिंग जारी नहीं की जाती है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की ओर से एयर क्वालिटी गाइडलाइंस सिर्फ सलाह होती हैं।
‘कोई भी देश एयर क्वालिटी रैंकिंग मानने के लिए बाध्य नहीं’ – सरकार, जानिए क्यों उठ रहे एयर क्वालिटी को लेकर सवाल?

भारत सरकार की ओर से संसद में कहा गया है कि दुनिया में ऐसे कई संगठन हैं जो एयर क्वालिटी की रैंकिंग देते हैं। WHO की ओर से एयर क्वालिटी गाइडलाइंस केवल सलाह होती हैं, कोई भी ऑफिशियल रैंकिंग एयर क्वालिटी को लेकर जारी नहीं की जाती है। ऐसे में कोई भी देश इन्हें मानने के लिए बाध्य नहीं होता है। सरकार का कहना है कि हर देश अपनी जरूरत, भौगोलिक स्थिति और परिस्थिति को ध्यान में रखकर अपने मानक बनाता है।

गुरुवार को राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए पर्यावरण मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने यह बात कही। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि किसी भी तरह की बाहरी रिपोर्ट पर सरकार पॉलिसी नहीं बनाती है। बता दें कि पिछले कुछ दिनों से भारत की गिरती एयर क्वालिटी पर लगातार सवाल पूछे जा रहे हैं।

WHO केवल सलाह देता है: सरकार

सोशल मीडिया पर भी भारत की पॉल्यूशन और एयर क्वालिटी तथा वेदर मैनेजमेंट की गिरती रैंकिंग पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसे लेकर राज्य मंत्री का कहना है कि WHO की गाइडलाइंस का मकसद देशों को उनकी ज्योग्राफी, एनवायरमेंटल कंडीशंस, बैकग्राउंड लेवल और राष्ट्रीय हालात को ध्यान में रखते हुए अपने स्टैंडर्ड बनाने में मदद करना है। भारत पहले ही पब्लिक हेल्थ और एनवायरमेंटल क्वालिटी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नेशनल एंबिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड का गठन कर चुका है। यह संस्था 12 मानकों पर काम करती है। हालांकि इस दौरान राज्य मंत्री ने सरकार की ओर से यह साफ किया कि अब तक कोई भी ग्लोबल अथॉरिटी ऐसी नहीं है जो ऑफिशियल तौर पर देशों को रैंकिंग प्रदान करती हो। WHO केवल सलाह देता है।

क्यों उठ रहा यह मुद्दा?

बता दें कि पिछले कुछ समय में भारत के एयर क्वालिटी इंडेक्स को लेकर चर्चा हुई है। दुनिया के शीर्ष 20 प्रदूषित शहरों में भारत के 13 शहरों का नाम शामिल रहा है, जिस पर सोशल मीडिया पर भी सरकार से कई तरह के सवाल पूछे गए। इन शहरों में दिल्ली, मुल्लापुर, फरीदाबाद, नई दिल्ली, गुरुग्राम, लोनी, श्रीगंगानगर, बर्नीघाट, ग्रेटर नोएडा, भिवाड़ी, मुजफ्फरपुर, हनुमानगढ़, नोएडा शामिल रहे हैं। हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि भारत भले ही ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स में नौवें स्थान पर है, लेकिन वह घरेलू पॉलिसी बनाने के आधार के तौर पर किसी बाहरी रैंकिंग को मान्यता नहीं देता है। सरकार का कहना है कि ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स खराब मौसम की घटनाओं से होने वाली इंसानी और आर्थिक नुकसान के आधार पर देशों को रैंकिंग प्रदान करता है, और खराब मौसम से होने वाले आर्थिक नुकसान के अनुमान अलग-अलग होते हैं।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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