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20 दिन पहले बंद हुई अमरनाथ यात्रा, बारिश-लैंडस्लाइड ने बढ़ाई मुश्किल, 4.8 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

Amarnath Yatra 2026 को खराब मौसम और लगातार बारिश के चलते तय तारीख से करीब 20 दिन पहले रोकने का फैसला लिया गया है। दरअसल 9 अगस्त से नए जत्थे नहीं भेजे जाएंगे, जबकि रास्ते में मौजूद श्रद्धालुओं की यात्रा पूरी कराई जाएगी।
20 दिन पहले बंद हुई अमरनाथ यात्रा, बारिश-लैंडस्लाइड ने बढ़ाई मुश्किल, 4.8 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

बाबा अमरनाथ की यात्रा इस बार तय समय से करीब 20 दिन पहले रोक दी गई है। लगातार बारिश, लैंडस्लाइड और रास्तों की खराब स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने 9 अगस्त से दोनों प्रमुख रूट पर नए श्रद्धालुओं की आवाजाही बंद करने का फैसला लिया है। प्रशासन के मुताबिक, अभी जो यात्री यात्रा पर हैं, उन्हें दर्शन कराकर सुरक्षित वापस लाने की व्यवस्था की जाएगी। अब तक 4.8 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पवित्र गुफा पहुंचकर बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं।

दरअसल डिविजनल कमिश्नर कश्मीर अंशुल गर्ग के मुताबिक, मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में खराब मौसम का अनुमान जताया है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है और कई जगह यात्रा मार्ग प्रभावित हुए हैं। ऐसे हालात में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आगे भेजना सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं माना गया। इसी वजह से प्रशासन ने यात्रा को आगे जारी रखने के बजाय नए जत्थों को रोकने का फैसला लिया।

छड़ी मुबारक के साथ किया जाएगा समापन

इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि अमरनाथ यात्रा का धार्मिक कार्यक्रम पूरी तरह खत्म हो गया है। जो श्रद्धालु पहले से यात्रा मार्ग पर हैं, उनकी यात्रा पूरी कराने पर जोर रहेगा। वहीं, तय परंपरा के अनुसार छड़ी मुबारक के साथ यात्रा का औपचारिक समापन किया जाएगा।

अमरनाथ यात्रा के दोनों रूट पर क्यों बढ़ी मुश्किल?

दरअसल अमरनाथ यात्रा के लिए मुख्य रूप से दो रास्तों का इस्तेमाल होता है। पहला पारंपरिक नुनवान-पहलगाम रूट है, जिसकी लंबाई करीब 48 किलोमीटर है। यह रास्ता लंबा जरूर है, लेकिन बालटाल के मुकाबले अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। दूसरा रास्ता गांदरबल जिले के बालटाल से होकर जाता है। यह करीब 14 किलोमीटर लंबा है, लेकिन इसमें चढ़ाई ज्यादा है और रास्ता कठिन माना जाता है।

वहीं बारिश के दौरान दोनों ही रास्तों पर यात्रियों के लिए मुश्किल बढ़ जाती है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश होने से मिट्टी खिसकने, पत्थर गिरने और रास्ते खराब होने का खतरा रहता है। अमरनाथ यात्रा में रोज हजारों श्रद्धालु इन रास्तों से गुजरते हैं, इसलिए किसी एक जगह रास्ता बंद होने पर पूरी यात्रा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही रहती है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ उनकी सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाए।

इस बार भी यात्रा रोकने का फैसला इसी सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। प्रशासन ने नए यात्रियों को आगे नहीं भेजने का फैसला किया है, ताकि खराब मौसम के दौरान रास्तों पर भीड़ न बढ़े और पहले से मौजूद यात्रियों को सुरक्षित निकाला जा सके।

28 अगस्त को छड़ी मुबारक से होगा समापन

वहीं अब 9 अगस्त से नए यात्रियों के लिए यात्रा रोक दी जाएगी। इसके बाद भी अमरनाथ यात्रा की धार्मिक परंपरा पूरी तरह खत्म नहीं होगी। 28 अगस्त को छड़ी मुबारक को पारंपरिक पहलगाम रास्ते से अमरनाथ गुफा ले जाया जाएगा। इसी धार्मिक कार्यक्रम के साथ अमरनाथ यात्रा 2026 का औपचारिक समापन माना जाएगा। इस तरह प्रशासनिक तौर पर यात्रा पहले बंद हो रही है, लेकिन धार्मिक परंपरा के मुताबिक समापन तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगा।

Rishabh Namdev
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मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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