किसी भी राज्य की पहचान का मूल उसकी राजधानी होती है, जो न केवल प्रशासनिक केंद्र होती है बल्कि उसके गौरव और आकांक्षाओं का प्रतीक भी। लेकिन आंध्र प्रदेश के लिए यह पहचान दशकों से एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है, एक ऐसा राजनीतिक भंवर जहाँ स्थिरता की तलाश आज भी जारी है। इसी भंवर से राज्य को निकालने की बात करते हुए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस. जगन मोहन रेड्डी के कथित ‘MAVIGUN’ बयान पर तीखा हमला बोला है।
नेल्लोर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि आंध्र प्रदेश के लोगों को तीन राजधानियों या नए-नए नारों की नहीं, बल्कि एक स्थायी और गौरवशाली राजधानी की आवश्यकता है। नायडू ने आरोप लगाया कि जगन सरकार ने बीते पाँच वर्षों तक राजधानी के मुद्दे पर केवल राजनीतिक दाँवपेंच खेले, जिससे राज्य के हिस्से में सिर्फ़ अपमान और अनिश्चितता ही आई। उन्होंने आंध्र प्रदेश की अब तक कोई एक स्थिर राजधानी न होने पर गहरा रोष व्यक्त किया, जो एक राज्य के लिए किसी बड़े दुर्भाग्य से कम नहीं।
राजधानी के मुद्दे पर सीएम नायडू ने विपक्ष को घेरा
‘हमने बिना राजधानी के लंबे समय तक अपमान झेला,’ नायडू ने कहा। ‘पहले उन्होंने तीन राजधानी की बात की और अब ‘MAVIGUN’ कह रहे हैं। मुझे खुद समझ नहीं आया कि इसका मतलब क्या है। मैं भी सबसे पूछ रहा हूँ, क्या किसी को इसका मतलब समझ आया?’ यह सवाल मात्र एक शब्द के अर्थ का नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य को लेकर व्याप्त भ्रम का प्रतीक है। उन्होंने दुनिया के हर राज्य की एक राजधानी होने का उदाहरण दिया, जिस पर वहाँ के लोग गर्व करते हैं। तमिलनाडु का नाम आते ही चेन्नई, कर्नाटक का बेंगलुरु और तेलंगाना का हैदराबाद याद आता है। लेकिन आंध्र प्रदेश के लोग अपनी राजधानी तक नहीं बता पा रहे थे, यह कैसी विडंबना है।
नायडू ने उस दौर को याद किया जब अमरावती परियोजना को लेकर विधानसभा में जगन मोहन रेड्डी ने खुद समर्थन की बात कही थी। तब 29 हज़ार किसानों ने स्वेच्छा से 33 हज़ार एकड़ ज़मीन लैंड पूलिंग योजना के तहत राजधानी के निर्माण के लिए दी थी, एक ऐसा त्याग जिसकी मिसाल कम ही मिलती है। लेकिन सत्ता बदलते ही उनका रुख भी बदल गया। मुख्यमंत्री नायडू ने आरोप लगाया कि अमरावती का निर्माण शुरू होने के बाद इसे रोकने के लिए एक गहरी साज़िश रची गई। उन्होंने दावा किया कि गन्ने के खेतों में आग लगाई गई और बाद में इसका आरोप तत्कालीन सरकार पर ही मढ़ दिया गया। यह सब राजधानी परियोजना को बदनाम करने और उसे पटरी से उतारने का एक सुनियोजित प्रयास था।
संसद में कानून बना, फिर भी वाईएसआर कांग्रेस ने नहीं किया समर्थन: नायडू
वाईएसआर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए नायडू ने कहा कि 2019 में सत्ता में आने के बाद जगन सरकार ने ‘तीन राजधानी’ का मुद्दा तो उठाया, लेकिन पाँच साल में कोई ठोस काम नहीं किया। यह केवल राजनीतिक दाँवपेचों का खेल था, जिससे राज्य के विकास को अपूरणीय क्षति पहुँची। मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आने के बाद अमरावती को स्थायी राजधानी का कानूनी दर्जा दिलाने के लिए केंद्र सरकार से लगातार बातचीत करती रही। उन्होंने दावा किया कि केंद्र ने इस पर सहमति जताई और संसद के दोनों सदनों में इसे कानून का रूप दिया गया, लेकिन वाईएसआर कांग्रेस ने इसका समर्थन नहीं किया, मानो वे राज्य के हित से अधिक अपने राजनीतिक एजेंडे को महत्व दे रहे थे।
‘MAVIGUN’ नारे पर फिर बरसे मुख्यमंत्री नायडू
नायडू ने निवेशकों की चिंता का भी ज़िक्र किया, जिन्होंने स्पष्ट कहा था कि यदि राजधानी को स्थायी कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी तो भविष्य में कोई दूसरी सरकार आकर फिर फैसला बदल सकती है, जिससे निवेश करना जोखिम भरा होगा। इसी वजह से उनकी सरकार ने कानूनी स्पष्टता सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए। अपने भाषण के अंत में मुख्यमंत्री ने वाईएसआर कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पहले ‘तीन राजधानी’ का प्रयोग किया गया और अब ‘MAVIGUN’ जैसा नया नारा दिया जा रहा है। आंध्र प्रदेश को भ्रम और राजनीतिक प्रयोगों की नहीं, बल्कि स्थिरता, भरोसे और एक मजबूत राजधानी की आवश्यकता है, जो उसे एक स्पष्ट पहचान दे सके।
क्या है ‘MAVIGUN’?
यह जानना भी आवश्यक है कि ‘MAVIGUN’ क्या है। यह आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस. जगन मोहन रेड्डी की ओर से दिया गया तीन राजधानियों के लिए प्रस्तावित नाम था। इसमें MA यानी मछलीपट्टनम, VI यानी विजयवाड़ा और GUN यानी गुंटूर को मिलाकर एक नया संक्षिप्त रूप गढ़ा गया था, जिसका उद्देश्य राज्य के तीन क्षेत्रों में तीन अलग-अलग राजधानियाँ स्थापित करना था।






