हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति और चंबा के पांगी क्षेत्र की पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। दरअसल शिमला हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत इन पंचायती राज संस्थाओं को उनका तय कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग करने का फैसला लिया गया था। हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि चुने गए पंचायत प्रतिनिधियों को अपना पांच साल का पूरा कार्यकाल करने का संवैधानिक अधिकार है।
दरअसल यह अहम आदेश मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने दिया। अदालत दीपक चौहान और अन्य जनप्रतिनिधियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद लाहौल-स्पीति के केलांग और चंबा के पांगी क्षेत्र की ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के मौजूदा प्रतिनिधि अगले आदेश तक अपने-अपने पदों पर बने रहेंगे।
राज्य सरकार की अधिसूचना पर रोक
अदालत ने राज्य सरकार की 24 जून 2026 की उस अधिसूचना पर रोक लगा दी है, जिसमें लाहौल-स्पीति के केलांग और चंबा के पांगी उपमंडल की पंचायती राज संस्थाओं को तुरंत प्रभाव से भंग करने का फैसला लिया गया था। यह फैसला स्थानीय जनप्रतिनिधियों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता था, लेकिन अब उन्हें राहत मिल गई है।
कार्यकाल 17 अक्टूबर 2026 तक तय
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल 17 अक्टूबर 2026 तक तय है। उनका कहना था कि भले ही मई 2026 में नए पंचायत चुनाव हो चुके हों, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद कराए गए थे, लेकिन इन नए चुनावों के आधार पर पुराने प्रतिनिधियों का कार्यकाल समय से पहले खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 243E का हवाला देते हुए कहा कि पंचायतों का कार्यकाल उनकी पहली बैठक की तारीख से पांच साल का होता है। इस अवधि को किसी भी संशोधन के जरिए कम नहीं किया जा सकता और ऐसा करना संवैधानिक नियमों का उल्लंघन होगा।
राज्य सरकार ने अधिनियम की धारा 120(4) का हवाला दिया
राज्य सरकार ने अपने पक्ष में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 120(4) का हवाला दिया। सरकार का कहना था कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि नई पंचायतों का कार्यकाल प्रदेश की दूसरी पंचायतों के कार्यकाल के साथ एक जैसा चल सके। सरकार की मंशा थी कि पूरे प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल एक साथ चले।
हाई कोर्ट ने सरकार की दलील पर आपत्ति जताई
हालांकि, हाई कोर्ट ने सरकार की इस दलील पर आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि जनवरी 2026 में किया गया कोई भी संशोधन पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी बताया कि सरकार ने खुद 6 जून 2026 को माना था कि नए चुने गए प्रतिनिधियों की पहली बैठक 18 अक्टूबर 2026 को होगी। लेकिन बाद में 24 जून की अधिसूचना के जरिए बैठक की यह तारीख बदलकर 27 जून कर दी गई। अदालत ने सरकार के इस विरोधाभासी कदम पर भी नाराजगी जताई।
इस महत्वपूर्ण मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार सहित सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2026 को होगी। तब तक लाहौल-स्पीति के केलांग और चंबा के पांगी क्षेत्र में पुराने पंचायत प्रतिनिधि ही अपने पदों की जिम्मेदारियां पहले की तरह निभाते रहेंगे। यह फैसला इन क्षेत्रों के स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों को लगातार जारी रखने में मदद करेगा और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की रक्षा करेगा।






