मनरेगा योजना में प्रस्तावित बदलावों को लेकर हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। दरअसल राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने केंद्र सरकार के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना राज्यों से चर्चा किए इतने बड़े बदलाव लागू करना सही नहीं है। उनका कहना है कि इन फैसलों का असर सीधे ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले मजदूरों और पंचायतों पर पड़ेगा।
दरअसल मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि मनरेगा लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने वाली अहम योजना रही है। अब योजना का नाम बदलने के साथ-साथ फंडिंग और संचालन व्यवस्था में भी बदलाव किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, पहले योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, लेकिन नए प्रावधानों के तहत राज्यों को भी अधिक हिस्सा देना होगा। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए यह अतिरिक्त वित्तीय दबाव पैदा कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि इससे राज्य सरकार की जिम्मेदारी और खर्च दोनों बढ़ेंगे।
मनरेगा फंडिंग पैटर्न में बदलाव पर बढ़ा विवाद
वहीं हिमाचल सरकार की सबसे बड़ी आपत्ति योजना के नए फंडिंग मॉडल को लेकर है। मंत्री अनिरुद्ध सिंह के मुताबिक, पहले मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी। अब विशेष श्रेणी वाले राज्यों के लिए 90:10 और अन्य राज्यों के लिए 60:40 का मॉडल लागू किए जाने की बात कही जा रही है। उनका कहना है कि इससे हिमाचल प्रदेश पर हर साल करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
केंद्र पर लगाया गंभीर आरोप
दरअसल मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि राज्य सरकार को मौजूदा रोजगार कार्यों के लिए भी अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास से जुड़े कई प्रोजेक्ट पहले से चल रहे हैं और नई व्यवस्था लागू होने पर उनकी लागत बढ़ जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र की ओर से मनरेगा कर्मचारियों के वेतन से जुड़ी राशि भी लंबित है। राज्य सरकार का कहना है कि यदि फंडिंग और भुगतान में देरी जारी रही तो जमीनी स्तर पर काम प्रभावित हो सकता है। इस मुद्दे को लेकर हिमाचल सरकार केंद्र से पुनर्विचार की मांग कर रही है।
मजदूरी दर और नए सिस्टम को लेकर उठे सवाल
वहीं मजदूरी दर में बदलाव को लेकर भी हिमाचल सरकार ने चिंता जताई है। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि राज्य में मनरेगा मजदूरों को पहले अधिक भुगतान किया जा रहा था, लेकिन नए नियमों के बाद मजदूरी दर कम होने की आशंका है। उनका कहना है कि इससे उन परिवारों पर असर पड़ेगा जो रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मनरेगा से मिलने वाली आय पर निर्भर रहते हैं।
इसके अलावा मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने योजना को सॉफ्टवेयर आधारित और नए पोर्टल से जोड़ने के फैसले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में कई गांव दूर-दराज इलाकों में स्थित हैं, जहां तकनीकी और इंटरनेट संबंधी चुनौतियां बनी रहती हैं। ऐसे में पूरी प्रक्रिया को डिजिटल सिस्टम पर आधारित करना आसान नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायतों की पारंपरिक योजना प्रक्रिया में बदलाव से स्थानीय स्तर पर कामकाज प्रभावित हो सकता है।






