SSC (Staff Selection Commission) की चयन परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर एक बार फिर देशभर से आए छात्र और शिक्षक सड़कों पर उतर आए हैं। शुक्रवार, 1 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करते हुए सैकड़ों छात्रों ने सिर पर काली पट्टी बांधकर सरकार और आयोग के खिलाफ विरोध जताया। छात्रों का आरोप है कि जिस परीक्षा एजेंसी Eduquity को SSC ने ठेका दिया है, वह पहले ही विवादों में रही है। व्यापम घोटाले जैसी घटनाओं से जुड़ चुकी यह कंपनी अब SSC की मेन परीक्षाओं को भी संचालित करने जा रही है।
परीक्षा नहीं, मज़ाक हो रहा है
छात्रों का आरोप है कि SSC की Selection Post Phase-13 परीक्षा में जिस तरह से गड़बड़ियां सामने आई हैं, उससे न केवल परीक्षा की गोपनीयता बल्कि उसकी निष्पक्षता भी संदेह के घेरे में है। एक ही शिफ्ट के सवाल दूसरी और तीसरी शिफ्ट में भी पूछे गए। कई केंद्रों पर सिस्टम क्रैश, माउस खराब, ब्लैक स्क्रीन की शिकायतें रहीं। कई छात्रों को गलत परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिए गए। कुछ को सेंटर से बाहर निकाल दिया गया, आधार ऑथेंटिकेशन या फिंगरप्रिंट मैच न होने पर। एक अभ्यर्थी ने कहा, “हमने कोचिंग छोड़ी, नौकरी छोड़ी, सालों मेहनत की… लेकिन यहां परीक्षा नहीं, साजिश दिखती है।”
ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को परीक्षा का ठेका
SSC ने हाल ही में Eduquity नामक एजेंसी को परीक्षा कराने का ठेका दिया है। लेकिन यही कंपनी पहले व्यापम जैसे बड़े घोटालों में फंस चुकी है और एक समय ब्लैकलिस्ट भी हो चुकी थी। छात्रों का सीधा सवाल है कि “जिस कंपनी से छोटे लेवल की परीक्षा नहीं संभल रही, उससे SSC CGL जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा कैसे कराई जाएगी?” विरोध कर रहे छात्रों और शिक्षकों की मांग है कि Eduquity से ठेका तुरंत वापस लिया जाए और नई निष्पक्ष एजेंसी को नियुक्त किया जाए।
रद्द परीक्षा, अनिश्चित भविष्य
SSC Phase-13 परीक्षा देश के कई केंद्रों पर बिना सूचना रद्द कर दी गई। छात्र हजारों किलोमीटर दूर से आए थे, पैसे खर्च किए, लेकिन सेंटर जाकर पता चला “पेपर कैंसिल है।” परीक्षा रद्द करने से पहले कोई SMS या ईमेल नहीं आया। जिन परीक्षार्थियों को एंट्री दी गई, उन्हें परीक्षा में बैठने से रोका गया। कई अभ्यर्थियों के अनुसार सेंटर स्टाफ ने दुर्व्यवहार भी किया। अब छात्र मांग कर रहे हैं कि रद्द की गई परीक्षाओं की नई तिथि जल्द घोषित की जाए और यात्रा व खर्च की भरपाई सरकार करे। इस विरोध का नेतृत्व कर रहे शिक्षक संगठनों और छात्र समूहों ने स्पष्ट किया कि जब तक SSC और सरकार इस पर संज्ञान नहीं लेते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। Eduquity से परीक्षा ठेका वापस लिया जाए।
Phase-13 परीक्षा की नई डेट शीट घोषित की जाए। तकनीकी समस्याओं की उच्चस्तरीय जांच हो और जिम्मेदार संस्थानों पर कार्रवाई हो। आधार आधारित ऑथेंटिकेशन को बाध्यकारी न बनाया जाए। अभी तक SSC या सरकार की तरफ से इस मसले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। SSC परीक्षाओं में गड़बड़ियों से लाखों युवाओं का भरोसा डगमगाया है। यह सिर्फ परीक्षा नहीं, बल्कि उनके भविष्य और आजीविका का सवाल है। अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो यह विरोध राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आंदोलन बन सकता है।





