गुवाहाटी: असम की राजनीति में एक बड़े उलटफेर के तहत कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा रविवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। गुवाहाटी स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय ‘वाजपेयी भवन’ में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया भी मौजूद रहे। बोरा के साथ कांग्रेस के एक और पूर्व कार्यकर्ता संजू बोरा ने भी बीजेपी की सदस्यता ली।
इस राजनीतिक कदम को 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए एक गंभीर झटके के तौर पर देखा जा रहा है। भूपेन बोरा को प्रदेश में कांग्रेस का एक मजबूत संगठनकर्ता माना जाता था और उनका सत्ताधारी दल में जाना पार्टी के लिए एक बड़ी क्षति है।
जब राहुल गांधी के मनाने पर भी नहीं माने थे बोरा
भूपेन बोरा ने 16 फरवरी को ही कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन पार्टी आलाकमान ने इसे स्वीकार नहीं किया था। इस्तीफे के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें मनाने की पूरी कोशिश की। पार्टी के वरिष्ठ नेता उनके आवास पर पहुंचे थे और यहां तक कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी उनसे फोन पर बात की थी। इन कोशिशों के बाद बोरा ने अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए कुछ समय मांगा था।
मुख्यमंत्री सरमा की मुलाकात के बाद तय हो गया था भविष्य
जिस दिन बोरा ने पुनर्विचार के लिए समय मांगा, उसके ठीक अगले ही दिन असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा खुद उनके आवास पर उनसे मिलने पहुंचे। इसी मुलाकात के बाद यह लगभग तय हो गया था कि बोरा भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सरमा ने उसी समय घोषणा कर दी थी कि भूपेन बोरा जल्द ही भाजपा में शामिल होंगे।
भूपेन बोरा बिहपुरिया विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं। उनकी जमीनी पकड़ और संगठनात्मक कौशल के कारण उन्हें कांग्रेस के मजबूत स्तंभों में गिना जाता था। उनके जाने से असम में कांग्रेस की चुनावी रणनीतियों और संगठन पर गहरा असर पड़ सकता है।





