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दिल्ली AI समिट में यूथ कांग्रेस के हंगामे पर बवाल, BJP-JDU ने बोला हमला, प्रदर्शन को बताया सोची-समझी साजिश

Written by:Gaurav Sharma
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित 'इंडिया एआई इंपैक्ट समिट' के दौरान यूथ कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बिहार के उप मुख्यमंत्री से लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तक, सत्तापक्ष के कई नेताओं ने इसे देश को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश और विदेशी टूलकिट का हिस्सा करार दिया है।
दिल्ली AI समिट में यूथ कांग्रेस के हंगामे पर बवाल, BJP-JDU ने बोला हमला, प्रदर्शन को बताया सोची-समझी साजिश

नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित ‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट’ के दौरान यूथ कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध-प्रदर्शन ने एक बड़े राजनीतिक तूफान को जन्म दे दिया है। सत्ताधारी दल के नेताओं ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधा है। बीजेपी और जेडीयू ने इसे भारत की वैश्विक छवि को धूमिल करने का एक सुनियोजित प्रयास बताया है।

यह प्रदर्शन उस समय हुआ जब समिट में देश-विदेश के गणमान्य व्यक्ति, उद्योगपति और विशेषज्ञ मौजूद थे। इसी को लेकर सत्तापक्ष ने कांग्रेस की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

‘देशद्रोह जैसा कृत्य’ और विदेशी टूलकिट का आरोप

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इस प्रदर्शन की कड़ी निंदा करते हुए इसे देशद्रोह जैसा कृत्य करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत का लोहा मान रही थी, ठीक उसी समय यह प्रदर्शन किया गया।

“जब पूरी दुनिया एआई समिट के जरिए भारत की बढ़ती ताकत और वैश्विक प्रतिष्ठा की सराहना कर रही है, तब राहुल गांधी के नेतृत्व में यूथ कांग्रेस विदेशी टूलकिट के निर्देश पर भारत-विरोधी नारे लगा रही है।”- तरुण चुघ, राष्ट्रीय महासचिव, भाजपा

जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी इसे कांग्रेस की एक सोची-समझी रणनीति बताया, जो उनके मुताबिक पार्टी पर ही उल्टी पड़ गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट है कि यह सब कुछ योजना के तहत किया गया था, जिससे पार्टी की छवि को भारी नुकसान हुआ है।

बिहार के मंत्रियों ने खोला मोर्चा

बिहार सरकार के कई मंत्रियों ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह महात्मा गांधी वाली कांग्रेस नहीं है, बल्कि विदेशी मानसिकता से प्रभावित हो चुकी है। उन्होंने कहा, “इस कांग्रेस को राष्ट्र से प्रेम नहीं है और यह राष्ट्रवाद से घृणा करती है।”

वहीं, बिहार सरकार के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने सीधे राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता भी अब राहुल गांधी से दूरी बना रहे हैं। जायसवाल ने कहा, “जब पार्टी के अनुभवी नेता ही दूरी बना रहे हैं, तो यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी की सोच राष्ट्र-विरोधी है।”

एक अन्य मंत्री संजय सिंह ने कहा कि इस विरोध के माध्यम से भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर शर्मिंदा करने का प्रयास किया गया, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं था।

उमर खालिद के प्रोटेस्ट से हुई तुलना

भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने इस घटना की तुलना डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के समय हुए सीएए विरोधी प्रदर्शनों से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह उमर खालिद ने भारत को बदनाम करने की बात कही थी, उसी तर्ज पर राहुल गांधी ने यह करवाया।

उन्होंने आरोप लगाया, “यह भारत को बदनाम करने की एक सोची-समझी और प्लान की गई साजिश थी। यह पहली बार नहीं है, राहुल गांधी ने बार-बार ऐसे काम किए हैं, जिससे भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।” इस बयान ने विवाद को एक नई दिशा दे दी है, जिसमें प्रदर्शन की मंशा पर गहरे सवाल उठाए गए हैं।

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