मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र की पूर्व संध्या पर राज्य की सियासत गरमा गई है। 23 फरवरी से शुरू हो रहे सत्र से पहले महा विकास आघाड़ी (MVA) ने शिंदे-फडणवीस-पवार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी में शामिल होने से इनकार करते हुए सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए और संकेत दिया कि सदन में सरकार की राह आसान नहीं होगी।
विपक्षी गठबंधन ने सरकार को ‘संस्थागत भ्रष्टाचार’ में लिप्त और सत्ता के घमंड में चूर बताया। एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम में, इस महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस और बैठक से शरद पवार गुट की एनसीपी के नेता नदारद रहे। इसे लेकर ‘कम्युनिकेशन गैप’ का हवाला दिया गया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा और विधान परिषद सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना में शरद पवार से कुछ दूरियां बनी हैं।
आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरा
विपक्ष ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया। MVA नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने महाराष्ट्र को 92,000 करोड़ रुपये के भारी कर्ज के जाल में फंसा दिया है। उन्होंने इसे सुशासन नहीं, बल्कि संस्थागत भ्रष्टाचार की संज्ञा दी।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री के दावोस दौरे पर भी सवाल उठाए गए। विपक्ष ने इस दौरे को एक ‘प्रचार यात्रा’ करार देते हुए खर्च हुए सार्वजनिक धन और बदले में आए निवेश पर एक श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। MVA का आरोप है कि बड़े-बड़े दावों के बावजूद कोई ठोस निवेश जमीन पर नहीं उतरा है। विपक्ष ने ‘लाडकी बहिन योजना’ पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस एक योजना के कारण राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा है और अन्य महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं के बजट में कटौती की जा रही है।
किसान, महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर आरोप
MVA ने राज्य में किसानों की बदहाली का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। यवतमाल जिले का हवाला देते हुए बताया गया कि पिछले सिर्फ एक महीने में 22 किसानों ने आत्महत्या कर ली, जो सरकार की किसान-विरोधी नीतियों का प्रमाण है। विपक्ष ने दावा किया कि सरकार किसानों के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील हो चुकी है।
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा गया। MVA ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए कहा कि राज्य से 1.57 लाख से अधिक महिलाएं और लड़कियां लापता हैं। एक आदिवासी महिला सरपंच के लापता होने का मामला भी प्रमुखता से उठाया गया। इसके साथ ही, विपक्ष ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र ‘ड्रग हब’ बनता जा रहा है और राज्य में नशीले पदार्थों का कारोबार बेरोकटोक फल-फूल रहा है।
विपक्ष ने कई अन्य मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा है:
- अजित पवार विमान हादसा: दिवंगत नेता के विमान हादसे की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए साजिश की आशंका को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया गया।
- ACB की कार्रवाई: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के छापों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया गया और संबंधित मंत्रियों से इस्तीफे की मांग की गई।
- स्कूलों का अल्पसंख्यक दर्जा: 75 स्कूलों को पहले अल्पसंख्यक का दर्जा देने और फिर उसे रद्द करने के फैसले में प्रशासनिक अनियमितताओं का आरोप लगाया गया।
कुल मिलाकर, महा विकास आघाड़ी के आक्रामक तेवर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आगामी बजट सत्र काफी हंगामेदार और चुनौतीपूर्ण रहने वाला है, जहां विपक्ष सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की पूरी तैयारी में है।





