महाराष्ट्र में आगामी राज्यसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य की 7 खाली हो रही सीटों में से 6 पर महायुति (NDA) की जीत लगभग तय है, जबकि महाविकास आघाड़ी (MVA) के खाते में एक सीट जाती दिख रही है। लेकिन इस एक सीट पर उम्मीदवार कौन होगा, इसे लेकर MVA के घटक दलों — शिवसेना (UBT), कांग्रेस और शरद पवार गुट — के बीच खींचतान शुरू हो गई है।
इस बीच, शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने गठबंधन में किसी भी तरह के बड़े मतभेद से इनकार किया है। उन्होंने साफ किया कि उम्मीदवार का फैसला बातचीत के जरिए ही होगा और इसमें वरिष्ठ नेताओं की भूमिका अहम होगी।
एक सीट, अनेक दावेदार
एमवीए के संख्या बल पर नजर डालें तो एक सीट पर जीत पक्की है। गठबंधन में शिवसेना (UBT) के 20, कांग्रेस के 16 और शरद पवार गुट के 10 विधायक हैं। विधायकों की संख्या के हिसाब से यह सीट शिवसेना (UBT) के खाते में जानी चाहिए। पार्टी नेता आदित्य ठाकरे ने भी इसी आधार पर सीट पर अपना दावा जताया था।
हालांकि, कांग्रेस इस सीट को छोड़ने के मूड में नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटील ने स्पष्ट किया है कि पार्टी को या तो राज्यसभा की एक सीट चाहिए या फिर विधान परिषद की एक सीट दी जाए। इस एक सीट पर चल रही रस्साकशी ने MVA के भीतर समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
“राज्य सभा की सीट को लेकर हमारी पार्टी, कांग्रेस और शरद पवार की पार्टी में कोई मतभेद नहीं है। शुरुआती मतभेद सामान्य बात होती है। आखिरकार यह पॉलिटिक्स है लेकिन हम परामर्श के बाद ही कोई फैसला लेंगे।” — संजय राउत, सांसद, शिवसेना (UBT)
क्यों अहम है पवार और ठाकरे का फैसला?
इस पूरे मामले में दो बड़े नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। एनसीपी के दिग्गज नेता शरद पवार का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है। वहीं, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे का विधान परिषद का कार्यकाल मई में खत्म होना है। संजय राउत ने भी इस ओर इशारा करते हुए कहा, “शरद पवार की भविष्य की योजनाओं पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। वह पांच दशकों से अधिक के विधायी अनुभव वाले सबसे वरिष्ठ नेता हैं, जबकि उद्धव ठाकरे पूर्व मुख्यमंत्री और एक राजनीतिक पार्टी के प्रमुख हैं।”
अगर कांग्रेस को राज्यसभा सीट मिलती है, तो उद्धव ठाकरे के लिए विधान परिषद में फिर से सदस्य बनना आसान हो सकता है। लेकिन अगर शिवसेना (UBT) राज्यसभा सीट अपने पास रखती है, तो यह देखना होगा कि कांग्रेस को विधान परिषद में कैसे समायोजित किया जाता है। इसके अलावा, शिवसेना (UBT) से प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है, जिससे पार्टी के भीतर भी कई दावेदार हो सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें MVA के शीर्ष नेतृत्व की बैठक पर टिकी हैं, जहां इस मुद्दे पर अंतिम मुहर लगेगी।






