महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े उलटफेर के तहत भिवंडी-निजामपुर नगर निगम के मेयर पद पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हार का सामना करना पड़ा है। चुनाव से ठीक पहले पार्टी के 9 पार्षदों ने बगावत कर दी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन का दामन थाम लिया। इसी बगावत का नेतृत्व करने वाले नारायण चौधरी अब शहर के नए मेयर होंगे।
शुक्रवार को हुए मतदान में सेक्युलर फ्रंट के उम्मीदवार नारायण चौधरी को 90 सदस्यीय सदन में 48 वोट मिले, जो बहुमत के लिए जरूरी 46 वोटों से दो ज्यादा हैं। यह घटनाक्रम बीजेपी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि उसके अपने ही पार्षदों ने विपक्षी खेमे की जीत का रास्ता साफ कर दिया।
ऐसे बदला पूरा सियासी समीकरण
90 सीटों वाली भिवंडी नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा 46 है। शुरुआत में कांग्रेस और एनसीपी को समाजवादी पार्टी के समर्थन का भरोसा था, लेकिन सपा ने आखिरी समय में शिवसेना को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इस अप्रत्याशित कदम के बाद कांग्रेस-एनसीपी का गणित बिगड़ गया।
इसी स्थिति से निपटने के लिए कांग्रेस और एनसीपी ने एक ‘सेक्युलर फ्रंट’ का गठन किया। इस कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब बीजेपी के 9 पार्षद, जिनका नेतृत्व नारायण चौधरी कर रहे थे, ने अपनी पार्टी से अलग होकर एक स्वतंत्र समूह बनाया और इस सेक्युलर फ्रंट को अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी।
बागियों के समर्थन से मिली जीत
बीजेपी के 9 पार्षदों के समर्थन के बाद कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की संयुक्त ताकत 51 तक पहुंच गई, जो बहुमत के आंकड़े से काफी ज्यादा थी। इसके बाद गठबंधन ने सर्वसम्मति से बागी नेता नारायण चौधरी को ही अपना मेयर पद का उम्मीदवार बना दिया। वोटिंग के दौरान चौधरी ने आसानी से 48 पार्षदों का समर्थन हासिल कर लिया और मेयर पद पर जीत दर्ज की। इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति में खलबली मचा दी है।






