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महाराष्ट्र राज्यसभा चुनाव: महाविकास अघाड़ी में एक सीट पर घमासान, शरद पवार के समर्थन पर शिवसेना-UBT ने रखी ये बड़ी शर्त

Written by:Gaurav Sharma
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महाराष्ट्र में राज्यसभा की एक जीतने योग्य सीट को लेकर महाविकास अघाड़ी (MVA) में आंतरिक खींचतान तेज हो गई है। एनसीपी (शरद पवार गुट) प्रमुख शरद पवार की संभावित उम्मीदवारी पर सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) ने विधान परिषद चुनाव में समर्थन के बदले ही यह सीट छोड़ने की शर्त रखी है।
महाराष्ट्र राज्यसभा चुनाव: महाविकास अघाड़ी में एक सीट पर घमासान, शरद पवार के समर्थन पर शिवसेना-UBT ने रखी ये बड़ी शर्त

महाराष्ट्र में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (MVA) के पास संख्या बल के हिसाब से सात में से एक सीट जीतना लगभग तय है, लेकिन इस एक सीट को लेकर गठबंधन के भीतर ही घमासान मचा हुआ है। एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार यदि चुनाव लड़ते हैं, तो उन्हें समर्थन देने पर आम सहमति बनती दिख रही है, लेकिन यह इतना आसान नहीं है।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने इस सीट पर अपना मजबूत दावा पेश करते हुए कुछ शर्तें सामने रख दी हैं, जिससे गठबंधन में सीटों का समीकरण उलझ गया है।

एक सीट पर MVA में क्यों है इतना घमासान?

राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के वोटों की जरूरत होती है। महाविकास अघाड़ी के पास कुल 47 विधायक हैं, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) के 20, कांग्रेस के 16 और एनसीपी (एसपी) के 10 विधायक शामिल हैं। इस गणित के हिसाब से MVA की एक सीट पक्की है। इसी एक सीट को लेकर तीनों दलों के बीच खींचतान जारी है। शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि यह सीट उसकी है और इस पर पार्टी का हक बनता है।

आदित्य ठाकरे ने याद दिलाया पुराना हिसाब

शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने अपनी पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते हुए कहा कि गठबंधन में सभी की स्पष्ट राय है कि यह सीट हमारी है। उन्होंने पुराने वाकयों का जिक्र करते हुए कहा कि 2020 में शिवसेना ने अपनी एक सीट एनसीपी को दी थी, जिसके बाद फौजिया खान राज्यसभा पहुंची थीं।

“2020 में हमने एनसीपी की फौजिया खान का समर्थन किया था। 2022 में संजय राउत तो जीत गए, लेकिन हमारे दूसरे उम्मीदवार संजय पवार हार गए। ऐसे में इस सीट पर हमारा दावा सबसे मजबूत है।”- आदित्य ठाकरे

आदित्य ठाकरे ने यह भी कहा कि राज्यसभा में पार्टी के संख्या बल और प्रियंका चतुर्वेदी एवं संजय राउत द्वारा किए जा रहे संघर्ष को देखते हुए सदन में पार्टी के दो सांसद होना जरूरी है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि एनसीपी (एसपी) के कांग्रेस में विलय की चर्चा चल रही है, जिससे भविष्य की राजनीति को लेकर स्पष्टता की आवश्यकता है।

पवार के समर्थन के बदले विधान परिषद में समर्थन की मांग

सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) ने एक फॉर्मूला पेश किया है। पार्टी का कहना है कि अगर MVA के सभी दल चाहते हैं कि शरद पवार राज्यसभा जाएं, तो उन्हें समर्थन दिया जा सकता है, लेकिन इसके बदले विधान परिषद चुनाव में एनसीपी (एसपी) और कांग्रेस को उद्धव ठाकरे के उम्मीदवार का समर्थन करना होगा। इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और तीनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच चर्चा जारी है।

जिन नेताओं का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें शरद पवार और फौजिया खान (एनसीपी-एसपी), प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना-यूबीटी), रामदास आठवले, भागवत कराड, रजनी पाटिल और धैर्यशील पाटिल शामिल हैं। अब देखना यह होगा कि MVA इस एक सीट पर आपसी सहमति बना पाता है या यह खींचतान गठबंधन में नई दरार पैदा करती है।

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