देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को देहरादून के बालावाला में आयोजित ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ में शिरकत की। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह मात्र एक सम्मेलन नहीं, बल्कि हिंदू समाज की चेतना, एकता और आत्मगौरव का महापर्व है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदू समाज आज जागृत होकर अपने धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के प्राचीन गौरव को पुनः स्थापित करने के लिए संगठित हो रहा है।
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में हिंदुत्व की व्यापकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, जहां भाषा, परंपरा और पूजा-पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन मानवीय मूल्य एक ही हैं।
हिंदुत्व की भावना और RSS का योगदान
सीएम धामी ने कहा कि जो भारत को अपनी मातृभूमि और पितृभूमि मानता है, यहां की संस्कृति और मूल्यों का सम्मान करता है, उसकी पूजा-पद्धति कोई भी हो, उसकी आत्मा हिंदू है। उन्होंने कहा, “हिंदुत्व हमें सिखाता है कि हम सब एक हैं, हमारी विविधताएँ ही हमारी शक्ति हैं और हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है।”
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से अपने जुड़ाव पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि RSS ने अपने 100 वर्षों के कार्यकाल में देश के सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित किया है और जन-जन में राष्ट्रभक्ति की भावना को स्थापित करने का काम किया है। उन्होंने शिक्षा, कृषि, समाज कल्याण और आदिवासी उत्थान जैसे क्षेत्रों में स्वयंसेवकों के निस्वार्थ योगदान की सराहना की।
सरकार के कड़े फैसलों का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सरकार द्वारा राज्य के ‘मूल स्वरूप’ को बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।
“राज्य सरकार देवभूमि के मूल स्वरूप को बनाये रखने लिए निरंतर कार्य कर रही है। सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून के साथ ही ऑपरेशन कालनेमी के माध्यम से सनातन धर्म को बदनाम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।”- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
उन्होंने देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने, मदरसा बोर्ड को समाप्त कर सभी के लिए समान शिक्षा की नींव रखने और सनातन हिंदू संस्कृति पर शोध के लिए “हिन्दू स्टडी सेंटर” स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये सभी कदम राज्य की पहचान को संरक्षित करने के लिए उठाए गए हैं।





