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अयोध्या में धर्म ध्वजा, तिरुमाला में ‘पंचमी साड़ी’ के साथ ब्रह्मोत्सव समापन और बद्रीनाथ कपाट बंद, भक्तों के लिए आस्था से भरा ऐतिहासिक मंगलवार

Written by:Shruty Kushwaha
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अयोध्या से लेकर दक्षिण भारत के तिरुमाला और उत्तराखंड के हिमालय धाम तक मंगलवार का दिन आस्था की अनूठी श्रृंखला लिए रहा। अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीराम मंदिर के शिखर पर केसरिया धर्म ध्वजा फहराई। दक्षिण में तिरुचानूर स्थित श्री पद्मावती अम्मवारी मंदिर में नौ दिवसीय कार्तिक ब्रह्मोत्सव का समापन परंपरागत ‘पंचमी साड़ी’ रस्म के साथ हुआ वहीं उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में आज सर्दियों के लिए कपाट बंद कर दिए गए। इस तरह ये दिन आस्था की किताब में एक महत्वपूर्ण तारीख की तरह दर्ज हुआ।
अयोध्या में धर्म ध्वजा, तिरुमाला में ‘पंचमी साड़ी’ के साथ ब्रह्मोत्सव समापन और बद्रीनाथ कपाट बंद, भक्तों के लिए आस्था से भरा ऐतिहासिक मंगलवार

Ayodhya Ram Mandir Flag

मंगलवार का दिन हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं के लिए बेहद विशेष रहा। एक तरफ अयोध्या श्रीराम मंदिर में पीएम मोदी ने केसरिया धर्म ध्वजा फहराई, वहीं आंध्र प्रदेश के तिरुमाला के श्रीवारी मंदिर में ‘पंचमी साड़ी’ समर्पित करने के साथ ही नौ दिवसीय कार्तिक ब्रह्मोत्सव का समापन हो गया। इसी के साथ आज श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट भी सर्दियों के लिए बंद कर दिए गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राममंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया। ‘धर्म ध्वजा’ फहराने के बाद उन्होंने कहा कि वो संपूर्ण विश्व के करोड़ों रामभक्तों को इस अविस्मरणीय क्षण की शुभकामनाएं देते हैं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वे राममंदिर निर्माण से जुड़े हर श्रमवीर, हर कारीगर, हर योजनाकार और हर वास्तुकार का अभिनंदन करते हैं। पीएम ने कहा कि आने सदियों और सहस्त्रों शताब्दियों तक ये धर्मध्वज प्रभु श्रीराम के आदर्शों और सिद्धांतों का उद्घोष करेगा।

तिरुमाला के श्रीवारी मंदिर में ब्रह्मोत्सव का समापन, जानिए क्या है ‘पंचमी साड़ी’ की रस्म 

एक तरफ अयोध्या में श्रीराम मंदिर के शीर्ष पर केसरिया ध्वज फहराया गया, दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश के तिरुमाला के श्रीवारी मंदिर में ‘पंचमी साड़ी’ की रस्म शुरू हुई। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले श्रीवेंकटेश्वर स्वामी की परम प्रिय पत्नी श्री पद्मावती देवी के नौ दिवसीय कार्तिक ब्रह्मोत्सव का आज तिरुचानूर में भव्य समापन हो गया। ‘पंचमी तीर्थम’ समारोह में ‘पंचमी साड़ी’ की रस्म बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इस रस्म को “साड़ी अर्पण” या “साड़ी प्रार्थना” भी कहा जाता है जो उत्सव के अंतिम दिन सम्पन्न होती है।

इस रस्म को गौरी-पद्मावती माता की आराधना माना जाता है।  ‘पंचमी साड़ी’ की रस्म के अंतर्गत हर साल एक विशिष्ट रेशमी साड़ी तथा अन्य पूजा-सामग्री जैसे हल्दी, कुमकुम, चन्दन आदि, तिरुमाला से तिरचानूर तक एक पारंपरिक शोभायात्रा के साथ भेजी जाती है। श्रीवारी की ओर से अपनी पत्नी को हर साल साड़ी भेजने की यह अनादिकाल से चली आ रही परंपरा भक्तों के लिए दांपत्य प्रेम और समर्पण का अनुपम उदाहरण मानी जाती है। इस रस्म में शामिल होने वाले दंपतियों का विश्वास है कि इससे वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

बद्रीनाथ धाम के कपाट सर्दियों के लिए बंद हुए

आज ही उत्तराखंड में श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट भी सर्दियों के लिए बंद कर दिए गए हैं। इससे पूर्व मंदिर को 12 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया गया है। इसी के साथ चार धाम यात्रा भी समाप्त हो गई। बता दें कि गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के द्वार पहले ही बंद किए जा चुके हैं। चारों धाम बंद होने का अर्थ है कि तीर्थयात्रा इस वर्ष के लिए समाप्त हो चुकी है। हर साल इस मौसम में चारों धाम के कपाट बंद कर दिए जाते हैं क्योंकि सर्दी के मौसम में आने-जाने वाले रास्ते तथा मंदिर-प्रांगण पर वर्षा, हिमपात आदि कारणों से मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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