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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर में किया ‘एकात्म पर्व’ का शुभारंभ, आद्य गुरु शंकराचार्य की स्मृति में पांच दिवसीय आयोजन

Written by:Shruty Kushwaha
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कार्यक्रम में देशभर से संत, विद्वान और विशिष्ट अतिथि शामिल हो रहे हैं। इस दौरान ‘अद्वैतामृतम्’ विमर्श श्रृंखला के तहत Gen-Z, पर्यावरण, सिख परंपरा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा। सांस्कृतिक संध्याओं में शास्त्रीय संगीत और नृत्य की विविध प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर में किया ‘एकात्म पर्व’ का शुभारंभ, आद्य गुरु शंकराचार्य की स्मृति में पांच दिवसीय आयोजन

Ekatma Parv Omkareshwar

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में आज ओंकारेश्वर के एकात्म धाम में ‘एकात्म पर्व’ का शुभारंभ हुआ। यह पांच दिवसीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महोत्सव 17 से 21 अप्रैल तक चलेगा। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के संयुक्त प्रयास से मांधाता पर्वत पर स्थित ‘एकात्म धाम’ में यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि “आद्य गुरु शंकराचार्य की पावन स्मृति और अद्वैत वेदांत के सार्वभौमिक संदेश को आम जन तक पहुँचाने के लिए एकात्म धाम, ओंकारेश्वर में आयोजित ‘आचार्य शंकर प्रकटोत्सव  एकात्म पर्व’ में शामिल होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। यह उत्सव भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और ‘एकात्म भाव’ के जागरण का सुंदर संगम है। अद्वैत का संदेश हमें याद दिलाता है कि पूरी सृष्टि एक ही चेतना से भरी हुई है।”

एकात्म धाम में भव्य आयोजन की शुरुआत

ओंकारेश्वर में पांच दिवसीय एकात्म पर्व का शुभारंभ हो गया है। आदि गुरु शंकराचार्य के प्रकटोत्सव के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में एकात्मता और संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिलेगा। इस आयोजन के दौरान ‘अद्वैतामृतम्’ नामक विमर्श श्रृंखला के तहत कई समसामयिक विषयों पर चर्चा होगी। 17 अप्रैल को ‘अद्वैत और Gen-Z’ विषय पर युवा दृष्टिकोण सामने रखा जाएगा। 18 अप्रैल को रामकृष्ण मिशन, सिख परंपरा और पर्यावरण जैसे विषयों के संदर्भ में अद्वैत दर्शन की व्याख्या की जाएगी। 19 अप्रैल को अद्वैत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैश्विक शांति तथा ‘एक भारत’ जैसे विषयों पर विशेषज्ञ विचार रखेंगे, जिनमें आईआईटी दिल्ली सहित कई संस्थानों के जानकार शामिल होंगे। 20 अप्रैल को चिन्मय मिशन से जुड़े संत वेदांत के आधुनिक प्रसार और उसके महत्व पर प्रकाश डालेंगे।

आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता का संगम

महोत्सव की शामें भारतीय संस्कृति की विविधता को समर्पित रहेंगी। ‘रसो वै सः’ थीम पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में शास्त्रीय संगीत और नृत्य की समृद्ध परंपराएं देखने को मिलेंगी। पहले दिन जयतीर्थ मेवुंडी का शास्त्रीय गायन और ओडिसी नृत्य से शुरुआत होगी। आगे के दिनों में गुरु वाणी, भरतनाट्यम, बाउल संगीत और कर्नाटक संगीत की प्रस्तुतियां होंगी। अंतिम दिन पद्मश्री हेमंत चौहान की निर्गुण भक्ति और मणिपुरी नृत्य विशेष आकर्षण रहेंगे।

700 से अधिक युवा बनेंगे ‘शंकरदूत’

21 अप्रैल को नर्मदा तट पर सुबह होने वाले दीक्षा समारोह में देश-विदेश के 700 से अधिक युवाओं को ‘शंकरदूत’ के रूप में दीक्षित किया जाएगा। इसी अवसर पर अद्वैत वेदांत के प्रचार-प्रसार में योगदान देने वालों को सम्मानित भी किया जाएगा। आयोजन के दौरान योग, ध्यान, प्राणायाम, रुद्रपाठ, यज्ञ और वैदिक अनुष्ठान भी नियमित रूप से आयोजित होंगे।

गौरतलब है कि ‘एकात्म धाम’ को वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां 108 फीट ऊंची ‘स्टैच्यू ऑफ वननेस’ स्थापित की जा चुकी है और आने वाले समय में 2195 करोड़ रुपये की लागत से अद्वैत दर्शन पर आधारित भव्य संग्रहालय का निर्माण प्रस्तावित है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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